MP News: ट्रैक्टर व कृषि यंत्रों पर GST कटौती, किसानों की जेब में आएंगे लाखों रुपए, शिवराज ने बताई ये बड़ी बात
GST cut on tractors: भारत के किसान, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उन्हें अब एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने कृषि यंत्रों और उपकरणों पर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) की दरों को घटाकर सिर्फ 5% कर दिया है। पहले यह दर 12% से 18% तक थी। इसका सबसे बड़ा फायदा ट्रैक्टर खरीदने वाले किसानों को होगा, जहां 35 एचपी के छोटे ट्रैक्टर पर 41,000 रुपये तक की बचत हो सकेगी।
बड़े 75 एचपी ट्रैक्टर पर यह बचत 63,000 रुपये तक पहुंच जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद इसकी घोषणा की है और कहा है कि यह कदम किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 22 सितंबर से यह नई दरें लागू हो जाएंगी। आइए, सरल भाषा में इस फैसले को विस्तार से समझते हैं - यह कैसे किसानों को फायदा पहुंचाएगा, क्यों जरूरी था यह कदम, और आगे क्या असर दिखेगा।

किसानों की बढ़ती लागत और सरकार का वादा
भारत में 14 करोड़ से ज्यादा किसान परिवार हैं, जिनमें से 85% छोटे और सीमांत किसान हैं। इनकी सबसे बड़ी समस्या है खेती की बढ़ती लागत। मजदूरी, बीज, खाद के साथ-साथ आधुनिक यंत्रों की कमी ने खेती को मुश्किल बना दिया है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर जैसे यंत्रों की ऊंची कीमतें छोटे किसानों के लिए सपना ही रह जाती हैं। जीएसटी काउंसिल ने 16 सितंबर 2025 को अपनी 54वीं बैठक में यह फैसला लिया, जिसमें कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया था, और यह कदम उसी दिशा में है।
शिवराज सिंह चौहान, जो खुद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और किसान परिवार से आते हैं, ने 19 सितंबर को नई दिल्ली में ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन (TMA), एग्रीकल्चरल मशीनरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AMMA), ऑल इंडिया कम्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) और पावर टिलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PTAI) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने साफ कहा, "यह जीएसटी कटौती किसानों तक सीधे पहुंचेगी। मैन्युफैक्चरर्स और डीलर्स को इसका लाभ बीच में न खाना पड़े।" चौहान ने पीएम मोदी का आभार माना और कहा, "यह फैसला खेती को सस्ता और आधुनिक बनाएगा।"
सरकार का लक्ष्य है कि इससे खेती में मैकेनाइजेशन (यंत्रीकरण) बढ़े, उत्पादकता दोगुनी हो और लागत 20-30% कम हो। छोटे किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) भी सस्ते हो जाएंगे, जहां यंत्र किराए पर मिलते हैं। चौहान ने निर्देश दिए कि किराया भी कम किया जाए।
जीएसटी कटौती का फायदा: ट्रैक्टर पर कितनी बचत, विस्तार से समझिए
यह जीएसटी कटौती सभी कृषि यंत्रों पर लागू है - ट्रैक्टर, ट्रॉली, हार्वेस्टर, थ्रेशर, पावर टिलर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर, बेलर आदि। पहले ट्रैक्टर पर 12% जीएसटी था, अब 5%। इसका मतलब, यंत्रों की कीमत 7-13% सस्ती हो जाएगी। मान लीजिए, एक ट्रैक्टर की आधार कीमत 5 लाख रुपये है, तो पहले 60,000 रुपये जीएसटी लगता था, अब सिर्फ 25,000 रुपये। यानी 35,000 रुपये की सीधी बचत। लेकिन वास्तविक बचत मॉडल के हिसाब से अलग-अलग है।
- | यंत्र का प्रकार | आधार मूल्य (लगभग) | पहले जीएसटी (12-18%) | नई जीएसटी (5%) | अनुमानित बचत (रुपये में) |
- | 35 एचपी ट्रैक्टर (छोटा) | 5-6 लाख | 12% | 5% | 41,000 |
- | 45 एचपी ट्रैक्टर | 7-8 लाख | 12% | 5% | 45,000 |
- | 50 एचपी ट्रैक्टर | 8-9 लाख | 12% | 5% | 53,000 |
- | 75 एचपी ट्रैक्टर (बड़ा) | 10-12 लाख | 12% | 5% | 63,000 |
- | पावर टिलर | 1-2 लाख | 18% | 5% | 11,875 |
- | हार्वेस्टर | 20-25 लाख | 18% | 5% | 1,87,500 |
- | थ्रेशर (मल्टी-क्रॉप) | 2-3 लाख | 18% | 5% | 14,000 |
- | स्ट्रॉ रीपर | 5-6 लाख | 18% | 5% | 21,875 |
- | बेलर | 10 लाख | 18% | 5% | 93,750 |
- | सीड ड्रिल | 50,000-1 लाख | 18% | 5% | 3,220-4,375 |
- | 4-रो paddy ट्रांसप्लांटर | 2 लाख | 18% | 5% | 15,400 |
ये आंकड़े सरकार के अनुमान पर आधारित हैं। छोटे ट्रैक्टर (35 एचपी) बागवानी और सब्जी खेती के लिए आदर्श हैं, जबकि बड़े वाले बड़े खेतों के लिए। हार्वेस्टर पर सबसे ज्यादा बचत होगी, जो कटाई का काम तेज करता है। चौहान ने कहा, "ट्रैक्टर के पार्ट्स और टायर्स पर भी जीएसटी कम होगा, जिससे मेंटेनेंस कॉस्ट घटेगी।"
उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश के एक छोटे किसान रामलाल को 35 एचपी ट्रैक्टर चाहिए था। पहले कीमत 5.50 लाख थी, अब घटकर 5.09 लाख हो जाएगी। यानी 41,000 रुपये बचेंगे, जो एक साल की मजदूरी के बराबर है। इसी तरह, पंजाब के बड़े किसान हरप्रीत सिंह को 75 एचपी ट्रैक्टर पर 63,000 रुपये की राहत मिलेगी।
शिवराज सिंह चौहान की बड़ी बातें: किसानों तक पहुंचेगी पूरी राहत
मीटिंग के बाद चौहान ने कहा, "सरकार का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है। इसके लिए उत्पादकता बढ़ानी होगी और खेती की लागत घटानी होगी। यंत्रीकरण दोनों करता है।" उन्होंने मैन्युफैक्चरर्स से वादा लिया कि 22 सितंबर से ही कीमतें कम होंगी। "पूर्ण पारदर्शिता हो, लाभ बीच में न रुके।"
चौहान ने 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के दूसरे चरण (3 अक्टूबर से रबी फसल के लिए) में इसकी जानकारी किसानों तक पहुंचाने का ऐलान किया। रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया और ग्राम पंचायतों के जरिए जागरूकता अभियान चलेगा। उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर्स को निर्देश दिया, "यंत्र सस्ते मिलेंगे, तो किराया भी कम करो। छोटे किसान इसका फायदा लें।" चौहान ने कहा, "पीएम मोदी के नेतृत्व में हम किसानों के साथ खड़े हैं। यह फैसला खेती को मजबूत बनाएगा।"
किसानों को व्यापक फायदा: छोटे से बड़े तक राहत
यह कटौती सिर्फ ट्रैक्टर तक सीमित नहीं। थ्रेशर से फसल की सफाई तेज होगी, हार्वेस्टर से कटाई में समय बचेगा। छोटे किसानों के लिए पावर टिलर जैसी मशीनें सस्ती होंगी, जो बैल की जगह लेती हैं। बड़े किसानों को हार्वेस्टर पर 1.87 लाख की बचत से बड़े खेत आसानी से संभाल सकेंगे।
NCRB डेटा के मुताबिक, 2024 में 70% किसानों के पास ट्रैक्टर नहीं था। यह फैसला मैकेनाइजेशन को 50% बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, इससे श्रम लागत 30% कम होगी और उपज 20% बढ़ेगी। दूध, पनीर जैसे डेयरी उत्पादों पर जीएसटी शून्य होने से किसानों को अतिरिक्त लाभ। चौहान ने कहा, "पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां भी मजबूत होंगी।"
किसान संगठनों का स्वागत, आगे की राह
किसान संगठनों ने फैसले का स्वागत किया। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, "यह सकारात्मक है, लेकिन सब्सिडी भी बढ़े।" ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स ने आश्वासन दिया कि कीमतें तुरंत कम होंगी। भविष्य में सरकार कॉटन पिकिंग जैसे नए क्षेत्रों में मैकेनाइजेशन पर फोकस करेगी। चौहान ने जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित किसानों से मिलने का ऐलान किया, जहां 76 करोड़ की मदद दी जाएगी।
अंत में, यह जीएसटी कटौती किसानों के लिए एक नई सुबह है। 22 सितंबर से ट्रैक्टर खरीदने का सही समय है। शिवराज चौहान की ये "बड़ी बात" न सिर्फ जेब भरेगी, बल्कि खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। किसान भाइयों, अब मौका आपके हाथ में है - आधुनिक खेती अपनाएं और लाभ उठाएं!
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