Bhopal News: भोपाल में आबकारी विभाग की कार्रवाई: अवैध शराब बरामद, लेकिन MRP से अधिक बिक्री पर सवाल

भोपाल में आबकारी विभाग की कार्रवाई: अवैध शराब बरामद, लेकिन MRP से अधिक बिक्री पर सवाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ एक और कार्रवाई की है। 24 जुलाई 2025 को गोल जोड़ बाईपास रोड, कोलार में आबकारी विभाग की टीम ने 6 पेटी अवैध विदेशी मदिरा बरामद की। इस कार्रवाई के बावजूद, शहर में खुलेआम एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से अधिक दामों पर शराब बिक्री की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है: क्या आबकारी विभाग की छोटी-मोटी कार्रवाइयां लोगों का ध्यान बड़े मुद्दों से भटकाने की कोशिश हैं? एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने से किसे फायदा हो रहा है, और इससे सरकार के राजस्व को कितना नुकसान हो रहा है?

Excise department action in Bhopal Illegal liquor recovered but question on sale above MRP

गोल जोड़ रोड पर आबकारी विभाग की कार्रवाई

कलेक्टर भोपाल कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के निर्देशन और सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ के मार्गदर्शन में आबकारी विभाग की एक टीम ने 24 जुलाई 2025 को कोलार के गोल जोड़ बाईपास रोड पर छापेमारी की। नियंत्रण कक्ष प्रभारी आर.जी. भदौरिया के नेतृत्व में आबकारी उपनिरीक्षक मनीष द्विवेदी और जिला आबकारी अमले ने यह कार्रवाई की।

टीम को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध शराब का संग्रहण और बिक्री हो रही है। छापेमारी के दौरान, आरोपी अंकित ठाकुर (पिता बृजलाल, निवासी कजलीखेड़ा, भोपाल) के कब्जे से एक बजाज ऑटो (वाहन नंबर MP04ZY4940) में 6 पेटी ऑफिसर चॉइस व्हिस्की बरामद की गई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत 50,000 रुपये और वाहन की कीमत 3,25,000 रुपये आंकी गई है।

आरोपी के खिलाफ मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1)(क) और 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ ने कहा, "अवैध शराब के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी जारी रहेंगी। हमारा उद्देश्य अवैध शराब के व्यापार को पूरी तरह खत्म करना है।"

एमआरपी से अधिक बिक्री: एक अनसुलझा मुद्दा

हालांकि आबकारी विभाग अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाइयां कर रहा है, लेकिन भोपाल में शराब की दुकानों पर एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने की शिकायतें आम हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई शराब दुकानों पर ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से 20-50% तक अधिक वसूली की जा रही है। यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि सरकार के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

वन इंडिया हिंदी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है, जिसमें बताया गया कि प्रदेशभर में शराब की दुकानों पर एमआरपी से अधिक दाम वसूलने की प्रथा जोरों पर है। यह सवाल उठता है कि ऐसी अनियमितताओं पर आबकारी विभाग का ध्यान क्यों नहीं जा रहा? क्या छोटी-मोटी कार्रवाइयां लोगों का ध्यान इस बड़े घोटाले से हटाने की कोशिश हैं?

राजस्व और काले धन का खेल

  • सरकारी राजस्व को नुकसान: शराब की बिक्री पर आबकारी कर सरकार के राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने पर अतिरिक्त राशि काले धन के रूप में इकट्ठा हो रही है, जिसका हिसाब दुकान मालिकों या बिचौलियों के पास जाता है, न कि सरकारी खजाने में।
  • काले धन में बढ़ोतरी: विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अनियमितताएं काले धन के सर्कुलेशन को बढ़ावा देती हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक है।
  • उपभोक्ता शोषण: आम ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जो उनके साथ अन्याय है।
  • आबकारी विभाग की वेबसाइट के अनुसार, मध्य प्रदेश में शराब की बिक्री और व्यापार को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम हैं। वर्ष 2022-23 की आबकारी नीति के तहत न्यूनतम और अधिकतम विक्रय दरें निर्धारित की गई हैं। इसके बावजूद, एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें नियमित रूप से सामने आ रही हैं।

आबकारी विभाग की चुनौतियां

मध्य प्रदेश आबकारी विभाग का मुख्य कार्य शराब के व्यापार की निगरानी, अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर रोक लगाना, और आबकारी कर की वसूली करना है। हाल ही में, विभाग ने 253 आबकारी आरक्षक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, जिसका उद्देश्य अवैध शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसना है।

हालांकि, भोपाल में अवैध शराब की बिक्री और एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि विभाग को और सख्ती बरतने की जरूरत है। पिछले साल, भोपाल में आबकारी विभाग ने एक बड़े अवैध शराब रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें ब्रांडेड बोतलों में नकली शराब बेची जा रही थी। उस कार्रवाई में चेतक ब्रिज के पास तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

जनता और विपक्ष का बयान

भोपाल के स्थानीय निवासियों ने एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बिक्री की शिकायतें बार-बार उठाई हैं। कोलार निवासी रमेश वर्मा ने कहा, "शराब की दुकानों पर बोतल की कीमत एमआरपी से 100-200 रुपये ज्यादा वसूली जाती है। आबकारी विभाग को ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।"

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और आबकारी विभाग पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा, "आबकारी विभाग की छोटी-मोटी कार्रवाइयां एक दिखावा मात्र हैं। एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने का रैकेट बड़े पैमाने पर चल रहा है, और यह बिना ऊपरी संरक्षण के संभव नहीं है। सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।"

आबकारी विभाग का रुख

सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ ने इस मुद्दे पर कहा, "हम अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। गोल जोड़ रोड पर हाल की कार्रवाई इसका उदाहरण है। एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों की भी जांच की जाएगी, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि विभाग जनता से शिकायतें प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल की सुविधा प्रदान करता है।

आबकारी विभाग की वेबसाइट पर शराब दुकानों पर शिकायतों के लिए अधिकारियों की सूची और संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश हैं। फिर भी, इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की कमी के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा है।

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