विधानसभा में पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट, CM शिवराज बोले, MP की आर्थिक स्थिति मजबूत

सीएम शिवराज ने कहा कि औद्योगिक विकास दर जो 2001-02 में -0.61% थी, वह 2022 में बढ़कर 24% हुई है। यदि आप राजस्व संग्रहण की बढ़ती हुई गति को देखेंगे, तो हमने लगातार राज्य के करों के संग्रहण को भी बढ़ाया है।

विधानसभा में पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट

मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। विधानसभा के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की गई। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण आया है। मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि आर्थिक सर्वेक्षण में जो तथ्य आए हैं, वे ये सिद्ध करते हैं कि मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन अच्छा है, आर्थिक स्थिति मजबूत है। सीएम ने कहा कि एक तरफ जहां हमने वित्तीय अनुशासन और सुशासन के साथ सर्व समावेशी विकास किया है तो वहीं दूसरी तरफ राज्य के बजट का आकार लगातार बढ़ा है। हमारा कर संग्रहण भी लगातार बढ़ रहा है।

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    मध्यप्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण पर शिवराज सिंह का बयान, कहा- मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन अच्छा है

    सीएम शिवराज ने कहा कि आज मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण आया है। सर्वेक्षण के तथ्य सिद्ध करते हैं कि मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत है। एक तरफ हमने वित्तीय अनुशासन और सुशासन के साथ सर्वसमावेशी विकास किया है,वहीं दूसरी तरफ राज्य के बजट का आकार तथा कर संग्रहण भी लगातार बढ़ा है। सीएम ने कहा कि वर्ष 2022-23 में मध्यप्रदेश की आर्थिक विकास दर में 16.43% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2001-02 में सकल घरेलू उत्पाद ₹71,594 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹13 लाख 22 हजार करोड़ हो गया है। वर्ष 2001-02 में प्रति व्यक्ति आय ₹11,718 थी, आज बढ़कर ₹1,40,500 हो गई है।

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को ऋण वितरण में 13.41 प्रतिशत और एमएसएमई क्षेत्र को ऋण देने में 30.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। स्ट्रीट वेंडर्स को भी ऋण प्रदान करने में मध्यप्रदेश सबसे आगे हैं। हमने 5.25 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को 521 करोड़ रु से अधिक का ऋण दिया है। ये सभी आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत है। जीएसडीपी का आकार लगातार बढ़ रहा है। करों का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है। प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ रही है।

    शिवराज ने कहा कि अक्सर हमारी सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि हम कर्जा ले रहे हैं, लेकिन यदि आप आंकड़े देखेंगे 2005 में ऋण जीएसडीपी अनुपात मतलब जीएसडीपी के अनुपात में जो कर्जा लेते थे, वह 39.5% था। लेकिन कोविड की कठिनाइयों के बावजूद 2020-21 में घटकर 22.6% हो गया है। ये अपने आप में सिद्ध करता है कि जीएसडीपी के अनुपात में ऋण का प्रतिशत लगातार घटा है। पिछले साल हमारा पूंजीगत व्यय 37 हजार 89 करोड रुपया था। हमने एक साल में उसको 23.18% बढ़ाया। अब बढ़कर 45 हजार 685 करोड़ रुपये हो गया है।

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