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MP News: SC के आदेश के बावजूद 12 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स 8 महीने से DA/DR से वंचित, हर माह हजारों का नुकसान

MP Employees News: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बार फिर महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (DA/DR) का मुद्दा गरमा गया है।

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से महंगाई भत्ते को कर्मचारियों का संवैधानिक हक करार दिया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश सरकार जुलाई 2025 से अब तक 3% अतिरिक्त DA/DR नहीं दे पाई है। परिणामस्वरूप राज्य के करीब 7.50 लाख नियमित कर्मचारी और 4.50 लाख से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारी पिछले 8 महीने से आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

Despite SC order 12 lakh employees-pensioners of MP deprived of DA DR for 8 months

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने आज भोपाल में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने महंगाई भत्ते को कर्मचारी का हक बताया है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार इस हक से 12 लाख से अधिक लोगों को वंचित रख रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जुलाई 2025 से 58% DA मिल रहा है, जबकि प्रदेश में अभी भी सिर्फ 55% ही मिल रहा है। यह 3% का अंतर हर कर्मचारी के वेतन में प्रतिमाह सैकड़ों से हजारों रुपये का नुकसान कर रहा है।"

प्रतिमाह कितना नुकसान हो रहा है?

संघ ने विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के वेतन पर प्रभाव का आंकड़ा जारी किया है (3% DA/DR की कमी से):

  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी: 465 से 556 रुपये प्रतिमाह
  • तृतीय श्रेणी कर्मचारी: 585 से 1,473 रुपये प्रतिमाह
  • द्वितीय श्रेणी अधिकारी: 1,683 से 2,019 रुपये प्रतिमाह
  • प्रथम श्रेणी अधिकारी: 2,397 से 4,230 रुपये प्रतिमाह

उमाशंकर तिवारी ने कहा, "यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह 12 लाख परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का सवाल है। महंगाई हर महीने बढ़ रही है-राशन, दूध, सब्जी, दवा, स्कूल फीस-सब महंगा हो रहा है। ऐसे में 3% DA/DR की कमी से हर परिवार की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।"

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश

उच्चतम न्यायालय ने कई फैसलों में महंगाई भत्ते को कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार माना है। कोर्ट ने कहा है कि महंगाई भत्ता मूल वेतन का हिस्सा है और इसे समय पर नहीं देना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। संघ का कहना है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से DA 58% कर दिया है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने अभी भी 55% पर ही रोका हुआ है।
तिवारी ने कहा, "केंद्र के कर्मचारी 58% DA ले रहे हैं, वहीं प्रदेश के कर्मचारी 55% पर अटके हैं। यह भेदभाव क्यों? सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना क्यों हो रही है?"

कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है

प्रदेश में सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में दिन-रात लगे रहने वाले अधिकारी-कर्मचारी आज खुद महंगाई से जूझ रहे हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री ने कहा कि पिछले 8 महीनों में संगठन ने लगातार ज्ञापन दिए, प्रदर्शन किए, मीटिंगें कीं, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

तिवारी ने चेतावनी दी, "यदि जल्द ही 3% DA/DR जारी नहीं किया गया और पिछले 8 महीनों का एरियर नहीं दिया गया तो संगठन मजबूरन बड़े आंदोलन की ओर जाएगा। हम शांतिपूर्ण तरीके से मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार अगर नहीं सुनी तो हमें कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।"

सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं

इस मुद्दे पर अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या वित्त विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार केंद्र के DA बढ़ोतरी के फैसले का इंतजार कर रही है और जल्द ही समानांतर बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इंतजार अब और नहीं सहा जाएगा।

मध्य प्रदेश के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह मुद्दा अब सिर्फ आर्थिक नहीं रहा-यह सम्मान और न्याय का सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में आंदोलन की तीव्रता बढ़ सकती है।

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