MP News: भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, सिंकराबाद-खरपा में गेट उड़ाए, बरखेड़ी में भी बाउंड्रीवाल ढही
Bhopal MP News: कभी चुपचाप बसाई गईं, तो कभी "आशीर्वाद" के सहारे आकार लेती गईं - लेकिन गुरुवार को भोपाल की इन अवैध कॉलोनियों का भाग्य पलट गया। शहर की शांति पसंद सड़कों पर गरजती जेसीबी ने यह बता दिया कि अब 'प्लॉट विदाउट परमिशन' की कहानी लंबी नहीं चलेगी।
हुजूर तहसील में प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों पर ऐसा बुलडोज़र चलाया कि गेट उड़ गए, बाउंड्रीवाल चकनाचूर हो गई और सपनों के फार्म हाउस धूल फांकते रह गए।

एक्शन का फुल डोज़: जेसीबी ने बजाई 'अवैधताओं' की मटकी
हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया की अगुवाई में गुरुवार को कई इलाकों में पुलिस बल के साथ बड़ी कार्रवाई हुई। जेसीबी के पंजे वहां चले, जहां कुछ साल पहले तक खेत थे, और अब बिना अनुमति के 'परिसर' बन गए थे।
यहां गूंजा बुलडोज़र का शोर
ग्राम खरपा: समृद्धि फार्म पर बनाई गई कॉलोनी के गेट को धड़ाम से गिराया गया। लोग समृद्धि के सपने देख रहे थे, लेकिन बाउंड्रीवाल पर जेसीबी की एक झलक ने वो सपना चूर-चूर कर दिया।
- ग्राम सिकंदराबाद: नूर खान पिता अनवर खान और आरिफ पिता पीरदास खान की ज़मीन पर बनाई गई कॉलोनी पर कार्रवाई हुई।
- उजमा इम्तियाज (पत्नी तारिक सिद्दीकी) के अरविंदो कॉलेज के सामने बन रहे प्रोजेक्ट पर भी प्रशासन की जेसीबी चढ़ गई।
- ग्राम बरखेड़ी बाज्यफत: राधाकृष्ण परिसर और एचके बिल्डर्स की निर्माणधीन कॉलोनियों पर भी बुलडोज़र का अभियान चला।
ग्राम कोड़िया:
डॉ अनिल खेवानी के कुशाग्र ग्रीन फार्म्स पर भी कार्रवाई हुई। यह फार्म हरा-भरा तो जरूर था, लेकिन नियमों से बिल्कुल दूर। सरकारी रास्ते पर बने अनधिकृत निर्माण को भी हटाया गया, ताकि लोग रास्ते में ना फंसें और सरकारी सड़कें अपनी जगह खुद तय कर सकें।
प्रशासन बोला: पहले चेताया था
एसडीएम सोनकिया ने बताया कि ये सब कोई 'रातोंरात' की कार्रवाई नहीं है। "पहले जांच की गई, फिर चेतावनी दी गई, अब कार्रवाई की गई। जो लोग नियमों से मुंह मोड़ते हैं, उन्हें जेसीबी का सामना करना ही पड़ता है।"
illegal colonies Bhopal: सवाल: अवैध कैसे बने 'परिसर'?
यह बात भी लोगों के मन में कौंध रही है कि आखिर इतनी बड़ी-बड़ी कॉलोनियां बस कैसे गईं? गेट बना, रोड डाली, बाउंड्रीवाल खड़ी हुई - और प्रशासन को खबर अब आई?
शायद यही वजह है कि लोग इन कॉलोनियों को 'आस्था के भरोसे' बनी बस्तियां कहने लगे थे - जहां "बिना नक्शा पास कराए ही घर खड़ा कर लो" वाला भरोसा काम कर जाता था।
अब क्या?
जिन लोगों ने प्लॉट खरीदे थे, उनके लिए ये एक बड़ा झटका है। प्रशासन ने एक बार फिर जनता को चेताया है कि प्लॉट खरीदने से पहले कॉलोनी की वैधता की जांच जरूर करें।
भोपाल में जेसीबी अब सिर्फ मलबा नहीं उड़ा रही, गलतियों की नींव हिला रही है। जो जमीन कल तक सपनों का आशियाना थी, आज मलबे का टीला बन गई। ये कार्रवाई उन सभी के लिए संकेत है जो बिना अनुमति के "मिनी टाउनशिप" बसाने के सपने देख रहे हैं - सपना देखो, पर नक्शा पास करवाकर।
illegal colonies Bhopal: अब तक भोपाल में हुई कार्रवाई का विवरण
भोपाल में अवैध कॉलोनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। 2022 के सर्वे के अनुसार, भोपाल जिले में 576 अवैध कॉलोनियां थीं, जिनमें से 2016 से पहले बनी 321 को वैध कर दिया गया था। हालांकि, 255 कॉलोनियां अभी भी अवैध थीं, और पिछले डेढ़ साल में 300 नई कॉलोनियां सामने आई हैं। इनमें से अधिकांश हुजूर तहसील के छावनी पठार, रायसेन रोड, नीलबड़, रातीबड़, और पिपलिया बरखेड़ी जैसे क्षेत्रों में हैं।
15 मई 2025 को प्रशासन ने हुजूर तहसील में एक बड़ी कार्रवाई की। हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया के नेतृत्व में राजस्व विभाग, पुलिस, और नगर निगम की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर जेसीबी चलाकर अवैध निर्माणों को तोड़ा। इस कार्रवाई में शामिल प्रमुख स्थान और गतिविधियां:
महावीर कॉलोनी, बिलखिरिया कलां (रायसेन रोड): यहां कॉलोनाइजर मनोज कुमार ने बिना डायवर्सन, T&CP, या नगर निगम की अनुमति के कॉलोनी विकसित की थी। सड़कें और अन्य निर्माण कार्य शुरू किए गए थे, जिन्हें जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। इसकी अनुमानित लागत 65 लाख रुपये थी।
छावनी पठार: मिलेनियम कॉलेज द्वारा 3 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया था, जिसे प्रशासन ने मुक्त कराया।
मयूरी गार्डन और ग्रीनवुड फार्म: इन स्थानों पर भी अवैध निर्माण तोड़े गए।
रोलूखेड़ी: पूर्व में हुई कार्रवाई में अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए थे, और इस बार भी इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई।कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया, "अवैध कॉलोनी काटने वाला कोई भी हो, चाहे वह कॉलोनाइजर हो या किसान, सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हमारी टीमें लगातार सर्वे कर रही हैं, और अब कोई भी अवैध प्लॉटिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
भोपाल में अवैध कॉलोनियों का जाल लंबे समय से फैल रहा था। कई कॉलोनाइजर किसानों के साथ साठगांठ कर, 100 रुपये के स्टांप पेपर पर अनुबंध करके सस्ते दामों पर प्लॉट बेच रहे थे। इन कॉलोनियों में बिजली, पानी, सड़क, और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, जिससे खरीदार अक्सर ठगा हुआ महसूस करते थे। 2023 में 92 कॉलोनाइजरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, और अब 70 और कॉलोनियों पर कार्रवाई की तैयारी है।
प्रशासन ने नई नीति अपनाई है, जिसके तहत:
- नोटिस और जांच: कॉलोनाइजरों को डायवर्सन, T&CP, और नगर निगम की अनुमति के दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं। जवाब न मिलने पर FIR दर्ज की जाती है।
- जमीन का अधिग्रहण: अवैध कॉलोनियों की जमीन को सरकार अपने कब्जे में लेगी और उसे विकसित करेगी। बचे हुए प्लॉट बेचकर प्राप्त धन से सड़क, बिजली, और पानी की सुविधाएं दी जाएंगी।
- रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक: कई कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।
भविष्य की योजनाएं
कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जीरो टॉलरेंस नीति की पुष्टि की है। प्रशासन ने 100 से अधिक कॉलोनियों को चिह्नित किया है, और मई 2025 से इन पर बुलडोजर और राजसात की कार्रवाई तेज होगी। मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 305, 326, और 327 के तहत अवैध कॉलोनियों को तोड़ा जा सकता है, और भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 57 के तहत जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। इसके अलावा:
- सर्वे और निगरानी: सभी तहसीलों में नियमित सर्वे किए जाएंगे।
- कानूनी कार्रवाई: कॉलोनाइजरों पर रासुका (NSA) लगाने की भी तैयारी है।
- विकास कार्य: अधिग्रहित जमीनों पर बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।












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