धार जिले में रिश्वतखोरी का सनसनीखेज खुलासा, नापतौल विभाग के उप नियंत्रक बाबूलाल गामड़ पर लोकायुक्त का शिकंजा

मध्य प्रदेश के धार जिले में भ्रष्टाचार की एक और कड़ी उजागर हुई है, जहां सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी का खेल बेखौफ जारी है। सरदारपुर निवासी राधेश्याम चौहान ने अपनी पत्नी के नाम पर चल रहे पेट्रोल पंप की मशीनों के कैलिब्रेशन के बदले 25,000 रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में नापतौल विभाग के उप नियंत्रक बाबूलाल गामड़ के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस को शिकायत की।

शिकायत की जांच में सत्यापन होने के बाद, लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचा रही है, बल्कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक सुधारों की जरूरत को भी रेखांकित कर रही है।

Bribery case exposed in Dhar Lokayukta tightens grip on Babulal Gamrad of the Metrology Department

मामले का पूरा ब्योरा: रिश्वत की मांग से शुरू हुई जांच

राधेश्याम चौहान, पिता चिमन चौहान, सरदारपुर (जिला धार) के निवासी हैं। उनकी पत्नी कौशल चौहान के नाम से सरदारपुर में 'आर.के. फ्यूल स्टेशन' नामक पेट्रोल पंप संचालित है। पेट्रोल पंपों पर लगी डिस्पेंसिंग मशीनों (जिनसे ईंधन की मात्रा मापी जाती है) का नियमित कैलिब्रेशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन मिले। इसी अनुपालन के लिए राधेश्याम ने 13 सितंबर 2025 को ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया था।

आवेदन के बाद, जिला धार के नापतौल विभाग के उप नियंत्रक बाबूलाल गामड़ ने कैलिब्रेशन करने के एवज में राधेश्याम से 25,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। राधेश्याम के अनुसार, आरोपी ने यह राशि नकद में मांगी और काम को तेजी से निपटाने का लालच दिया। परेशान राधेश्याम ने इसकी शिकायत इंदौर स्थित लोकायुक्त कार्यालय के पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सहाय से की। लोकायुक्त टीम ने शिकायत का गुप्त सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत की मांग सही पाई गई। नतीजतन, आरोपी बाबूलाल गामड़ के खिलाफ अपराध क्रमांक 200/25 दर्ज किया गया और मामले की विवेचना शुरू हो गई है।

लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक, आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है, और जांच में विभागीय अधिकारियों के अन्य संदिग्ध कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। राधेश्याम ने बताया, "मैं एक छोटा व्यापारी हूं, और यह रिश्वत मेरे लिए बड़ी रकम थी। लोकायुक्त की कार्रवाई से न्याय की उम्मीद जगी है।"

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7: क्या कहता है कानून?

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 सरकारी सेवकों द्वारा रिश्वत मांगने या लेने से संबंधित है। इस धारा के तहत, यदि कोई लोकसेवक अपने कर्तव्य निर्वहन के बदले अनुचित लाभ की मांग करता है, तो उसे 3 से 7 वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस इस अधिनियम के तहत सक्रिय रूप से काम कर रही है।

पिछले वर्षों में, राज्य में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां नापतौल विभाग के अधिकारी पेट्रोल पंपों, दुकानों और उद्योगों से रिश्वत वसूलते पकड़े गए। उदाहरण के लिए, 2024 में इंदौर में एक समान मामले में एक इंस्पेक्टर को 10,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 7 के तहत सजा की दर बढ़ रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर पारदर्शिता की कमी अभी भी समस्या बनी हुई है।

नापतौल विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें

नापतौल (वेट्स एंड मेजर्स) विभाग का मुख्य कार्य माप-तौल की सटीकता सुनिश्चित करना है, जो उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है। मध्य प्रदेश में यह विभाग उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के अधीन आता है। पेट्रोल पंपों के लिए कैलिब्रेशन हर 6 महीने में अनिवार्य है, और फीस नाममात्र की होती है (लगभग 500-1000 रुपये प्रति मशीन)। लेकिन कई मामलों में, अधिकारी अतिरिक्त रिश्वत मांगते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों पर बोझ बढ़ता है।

धार जिला, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र है, में ऐसे मामले आम हैं। जिले में लगभग 150 पेट्रोल पंप हैं, और कई मालिकों ने अनौपचारिक रूप से रिश्वत की शिकायत की है। लोकायुक्त इंदौर यूनिट, जो धार सहित 7 जिलों को कवर करती है, ने 2025 में अब तक 15 से अधिक भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं। एसपी राजेश सहाय ने कहा, "हमारी टीम 24/7 अलर्ट पर है। नागरिकों से अपील है कि रिश्वत मांगने पर तुरंत शिकायत करें।"

प्रभावित पक्षों की कहानी: राधेश्याम और उनका परिवार

राधेश्याम चौहान एक साधारण किसान परिवार से हैं, जो सरदारपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी कौशल चौहान ने 2020 में आर.के. फ्यूल स्टेशन शुरू किया था, जो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का स्रोत भी है। पंप पर 4 डिस्पेंसिंग मशीनें हैं, और कैलिब्रेशन न होने से व्यापार प्रभावित हो सकता था। राधेश्याम ने बताया, "हम ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन ऐसे अधिकारी सिस्टम को खराब कर रहे हैं।"

यह मामला महिलाओं के सशक्तिकरण से भी जुड़ा है, क्योंकि पंप कौशल के नाम पर है। मध्य प्रदेश सरकार की 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं के बीच, ऐसे मामले महिलाओं के उद्यमिता प्रयासों पर पानी फेरते हैं।
राज्य स्तर पर प्रशासनिक बदलाव: क्या होगा असर?

मामले के ठीक एक दिन पहले, 30 सितंबर 2025 को मध्य प्रदेश सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया। समाज कल्याण विभाग के आदेश क्रमांक ई-1/142/2025/5/क के तहत 30 से अधिक कलेक्टरों और अपर सचिवों के तबादले किए गए। हालांकि धार जिले के कलेक्टर का नाम इस सूची में सीधे नहीं है, लेकिन कई संबंधित विभागों में बदलाव हुए हैं, जो भ्रष्टाचार जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए:

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान: लोकायुक्त की भूमिका

मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन 1981 से सक्रिय है और अब तक हजारों मामलों में कार्रवाई कर चुका है। 2025 में, संगठन ने डिजिटल शिकायत पोर्टल शुरू किया, जहां कोई भी ऑनलाइन रिपोर्ट कर सकता है। इंदौर यूनिट ने हाल ही में एक रेड में 50 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की थी।

विपक्षी नेता कमलनाथ ने कहा, "सरकार तबादलों से दिखावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार जारी है।" वहीं, भाजपा प्रवक्ता ने जवाब दिया, "हमारी सरकार ने लोकायुक्त को मजबूत किया है।"

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