'बुलडोजर के आगे छाती अड़ाकर खड़ा ना होना पड़े', प्रदेश BJP कार्यालय को तोड़ने को लेकर खफा है रघुनंदन शर्मा
MP प्रदेश कार्यालय को तोड़ने के खिलाफ भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी है। रघुनंदन शर्मा ने कड़े शब्दों में कार्यालय तोड़ने को गलत बताया है।
भोपाल,14 सितंबर। प्रदेश भाजपा कार्यालय यानी दीनदयाल उपाध्याय परिसर को तोड़ने के खिलाफ भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी है। रघुनंदन शर्मा ने कड़े शब्दों में कार्यालय तोड़ने को गलत बताया है। उन्होंने लिखा कि जब किसी युद्ध में कुशल महारथी का प्रशिक्षित हाथी पागल हो जाता है, तो वह अपनी ही सेना को कुचलने लगता है। हम भी अपनी ही पार्टी के कार्यालय को अपने हाथों से तोड़ने का दूषित विचार अपने मन में ला रहे हैं। ये काम निष्ठावान कार्यकर्ताओं के हृदय पर पत्थर मारने जैसा है। ये काम कोई कठोर हृदय व्यक्ति ही कर सकता है।

क्या संगठन की परिभाषा अब बदल गई है : रघुनंदन शर्मा
रघुनंदन शर्मा ने लिखा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा ने मुझसे फोन पर बात की और बताया कि दीनदयाल परिसर ध्वस्त किया जा रहा है। प्रदेश के लोग मौजूदा कार्यालय का ही नवीनीकरण व सौंदर्यीकरण चाहते थे, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस कार्यालय को तोड़के नया बनाने का आदेश दिया है। मेरा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस कार्यालय का भ्रमण करके देखा, नहीं तो जिसे देखा नहीं उसे मिटाने का निर्णय दिल्ली से दौलताबाद राजधानी बनाने जैसा है। आतंकवाद, अलगाववाद और जघन्य अपराधी के भवनों पर बुलडोजर चल रहे हैं, तो भाजपा कार्यालय इनमें से किसी श्रेणी में आता है। रघुनंदन शर्मा ने लिखा कि सुमित्रा महाजन, विक्रम वर्मा, हिम्मत कोठारी, मेघराज जैन भंवर सिंह शेखावत, माखन सिंह चौहान में से किसी से कार्यालय तोड़ने पर राय नहीं ली गई। यह लोग अब पदाधिकारी नहीं है, लेकिन क्या इन सब को मिलाकर अब संगठन नहीं कहलाता। क्या संगठन की परिभाषा अब बदल गई है।

इस कार्यालय के निर्माण में रात-रात भर मैं जगा हूं : शर्मा
शर्मा ने आगे लिखा कि मैंने भी कुशाभाऊ ठाकरे के 25 साल का कार्यकाल व्यतीत किया। वह सर्वसम्मति बनाकर कोई निर्णय लेते थे। हम क्या ऐसी उच्चतम परंपराएं भी ध्वस्त कर चुके हैं। यह दीनदयाल परिसर शुभ है, इसमें आने के बाद हम विधानसभा, लोकसभा ऊपर नीचे सब संस्थाओं में जीते। इस कार्यालय के निर्माण में रात-रात भर मैं जगा हूं। कई बार सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक हम काम में लगे रहते थे। नीमच फैक्ट्री से सस्ती सीमेंट लाना। इंदौर से सीधे स्टील फैक्ट्री से स्टील लाना। लालकृष्ण आडवाणी ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया था। जनसंघ से पार्टी के सत्ता में आने तक छोटे कार्यालय में बैठकर विशाल संगठन खड़ा किया।
दिल्ली में हमने विशाल राज महल जैसा कार्यालय बनाया, लेकिन वहां संगठन सिकुड़ गया दो-दो बार विधानसभा में वहां दहाई संख्या पार नहीं कर पाए। छोटे कार्यालय में ही विशाल हृदय के कार्यकर्ताओं के जरिए विशाल संगठन खड़ा हुआ है। अब बड़े भवनों में बैठकर बड़ा कर लेंगे, यह सोच असफल हुई है।

बुलडोजर के आगे छाती अड़ाकर कार्यकर्ता को खड़ा ना होना पड़े
शर्मा ने आगे लिखा कि इस कार्यालय को ध्वस्त होना जानकर आहत हुआ। हमने इसे इतना मजबूत बनाया कि जितनी राशि में यह बना, उससे ज्यादा राशि तो इसे तोड़ने में लग जाएगी। कहीं ऐसा ना हो कि इस निर्णय का विरोध करने के लिए कार्यकर्ताओं को बुलडोजर के सामने छाती अड़ाकर खड़ा होना पड़े।

शर्मा ने शीर्ष नेतृत्व को सुझाव भी दिए
रघुनंदन शर्मा ने सुझाव देते हुए बताया कि कार्यालय को ऐसा ही रहने दिया जाए पार्टी सामने आरटीओ स्थित भवन के स्थान पर नया कार्यालय बना सकती है। इसके लिए परिवहन विभाग से उस जमीन को शासन को वापस कराया जा सकता है। फिर शासन उस जमीन को भाजपा को आवंटित कर दें। मौजूदा भवन भी इसी तरह बना है। पहले ये जमीन गृह निर्माण मंडल के पास थी। गृह निर्माण मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष ने इसे अनुपयोगी बताकर लौटाया। फिर शासन से भाजपा को आवंटित हो गई। रघुनंदन शर्मा ने कांग्रेस का उदाहरण भी दिया कि कांग्रेस ने रोशनपुरा के पुराने कार्यालय जवाहर भवन को दोस्त नहीं किया, बल्कि लिंक रोड नंबर वन पर नई जमीन आवंटित कराकर नया भवन बनाया, ऐसे ही भाजपा भी करें।












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