MP News: अरबपति विधायक संजय पाठक पर गंभीर आरोप, हाईकोर्ट जज को प्रभावित करने की कोशिश, जानिए पूरा मामला
MP News: मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार आरोप है कि उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक जज को फोन कर अपने परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों के मामले में प्रभावित करने की कोशिश की।
यह खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि खुद जज ने अपने आदेश में किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर 2025 को जारी अपने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है कि "संजय पाठक ने मुझे एक विशेष मामले (उनकी खनन कंपनियों से जुड़े) पर चर्चा करने की कोशिश की। इसलिए, मैं इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहा हूं।

पूरा मामला: खनन घोटाले से शुरू हुई कहानी
यह पूरा विवाद संजय पाठक की दो खनन कंपनियों - आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्भय मिनरल्स - से जुड़ा है। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने स्वीकृत सीमा से अधिक खनन कर खनिजों की चोरी की है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब संजय पाठक के पूर्व सहयोगी और मित्र आशुतोष मनु दीक्षित ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दर्ज कराई। दीक्षित का आरोप था कि इन कंपनियों ने अतिरिक्त खनन कर राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। EOW ने इस शिकायत को खनिज विभाग को सौंप दिया, निर्देश देते हुए कि विभाग अपनी स्तर पर जांच करे और यदि आवश्यक हो तो EOW को सूचित करे।
हालांकि, दीक्षित का दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद, उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, मांग की कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को मामले से अलग कर लिया, कारण बताते हुए कि विधायक संजय पाठक ने उन्हें फोन कर मामले पर चर्चा करने और मदद मांगने की कोशिश की।
443 करोड़ का जुर्माना: विधानसभा में हुआ खुलासा
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मध्यप्रदेश विधानसभा के पिछले सत्र में खनिज मंत्री (जो वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव भी हैं) ने सदन में जवाब दिया कि संजय पाठक की इन दोनों कंपनियों पर 443 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना अतिरिक्त खनन और खनिज चोरी के आरोपों के आधार पर लगाया गया। हालांकि, कंपनियों ने इस जुर्माने को चुनौती दी है, और यही मामला हाईकोर्ट में लंबित है। जज के रेक्यूजल के बाद अब इस याचिका की सुनवाई किसी अन्य बेंच द्वारा की जाएगी।
संजय पाठक का बैकग्राउंड: खनन साम्राज्य और राजनीतिक सफर
संजय पाठक मध्यप्रदेश के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक हैं और एक प्रमुख खनन कारोबारी हैं। परिवार की कंपनियां राज्य में लौह अयस्क और अन्य खनिजों के खनन में सक्रिय हैं। पाठक का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था, लेकिन 2018 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की। वे पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, उनके खिलाफ पहले भी कई आरोप लगे हैं, जैसे 2020 में आयरन ओर माइंस बंद करने का मामला और हाल ही में दिंडोरी में आदिवासी भूमि हड़पने के आरोप।" पाठक ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया है।
आशुतोष मनु दीक्षित का रोल: पूर्व मित्र से दुश्मन?
आशुतोष मनु दीक्षित, जो संजय पाठक के पूर्व सहयोगी हैं, अब उनके खिलाफ हो गए हैं। दीक्षित और पाठक परिवार के बीच संबंध अब तनावपूर्ण हैं। दीक्षित की शिकायत ने इस पूरे घोटाले को उजागर किया है। वे दावा करते हैं कि कंपनियों ने नियमों का उल्लंघन कर करोड़ों का लाभ कमाया है।
आगे क्या? जांच और संभावित परिणाम
जज के रेक्यूजल के बाद मामले की सुनवाई नई बेंच करेगी। EOW और खनिज विभाग से कार्रवाई की उम्मीद है। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो संजय पाठक पर न्यायिक अवमानना का केस भी चल सकता है। यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति और न्याय व्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है। भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पाठक ने इसे साजिश बताया है।












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