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CM मोहन यादव ने किया तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ, बोले – “कुआं चलकर प्यासे के पास आया है

कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में सोमवार को मध्य प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास का सबसे बड़ा संवाद शुरू हुआ। तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पंचायत कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। मंच पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्य मंत्री राधा सिंह लोधी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

देश-विदेश में चर्चित इस सभागार में करीब डेढ़ हजार जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और चुनिंदा सरपंच एकत्र हुए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पंचायत प्रतिनिधियों को न केवल नई ताकत दी, बल्कि एक नया सपना भी दिखाया कि आने वाले दिनों में वे नई विधानसभा तक पहुंचेंगे।

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मुख्यमंत्री ने सबसे पहले जिला पंचायत और जनपद पंचायत उपाध्यक्षों के स्कूल निरीक्षण को सार्थक बनाने का बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब निरीक्षण सिर्फ कागजी नहीं रहेगा। उपाध्यक्ष जो कमियां रेखांकित करेंगे, उन्हें लिपिबद्ध किया जाएगा और कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। डॉ. यादव ने कहा, "आपकी रिपोर्ट अब फाइलों में नहीं दबेगी, उसका असर दिखेगा।"

उन्होंने पंचायतों को सशक्त बनाने की अपनी सोच को कबीर की पंक्तियों से जोड़ा। "धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।" सीएम ने कहा कि जल्दबाजी नहीं करेंगे, लेकिन तीन दिन का यह खुला संवाद पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने सभागार के ऐतिहासिक महत्व को याद दिलाते हुए कहा कि 1956 से नई विधानसभा बनने तक यही विधानसभा थी। आज यहीं से शुरुआत है। आने वाले समय में आप सब नई विधानसभा तक पहुंचेंगे। यह मेरा वादा है।

सीएम ने गांवों को भारत की आत्मा बताते हुए कहा कि आदिकाल से हमारे समाज में स्वशासन की परंपरा रही है। पंचायतें अब सिर्फ योजनाएं लागू करने की इकाई नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास के हर पैमाने को खुद तय करेंगी। उन्होंने कहा कि आज तक प्यासा कुएं के पास जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने कुआं चलकर प्यासे के पास पहुंचा दिया है। तीन दिन खुलकर अपनी समस्याएं बताइए। हर समस्या का समाधान यहीं निकलेगा।

मुख्यमंत्री ने पदों को व्यक्तिगत नहीं, व्यवस्था का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आज हम मुख्यमंत्री हैं, आप मंत्री हैं, कोई जिला पंचायत अध्यक्ष है, कोई उपाध्यक्ष। ये सब दायित्व हैं। इन दायित्वों के जरिए हम सब मिलकर गांवों को मजबूत बनाएंगे। क्योंकि गांव मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा।

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कार्यशाला के तीन दिन के एजेंडे को विस्तार से बताया। पहले दिन सेमी-अर्बन पंचायतों का विकास और जिला पंचायतों का डेवलपमेंट प्लान, दूसरे दिन जल संरक्षण, स्वच्छता और पेसा एक्ट, तीसरे दिन आत्मनिर्भर पंचायत मॉडल और मनरेगा को आखिरी कदम बनाने पर चर्चा होगी। हर सत्र में मंत्री और अधिकारी सीधे सवालों के जवाब देंगे।

सभागार में जब सीएम ने कहा कि "आने वाले समय में आप नई विधानसभा तक पहुंचेंगे", पूरा हॉल तालियों और "भारत माता की जय, पंचायत राज जिंदाबाद" के नारों से गूंज उठा। कई महिला सरपंचों की आंखें नम हो गईं। एक बुजुर्ग जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने कहा, "पहली बार लगा कि हम भी सरकार का हिस्सा हैं।"

तीन दिन तक चलने वाली यह कार्यशाला मध्य प्रदेश की 23 हजार ग्राम पंचायतों, 313 जनपद पंचायतों और 52 जिला पंचायतों के लिए नया सवेरा लेकर आई है। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार से निकला यह संवाद अब गांव-गांव तक पहुंचेगा। जैसा सीएम ने कहा, "ऋतु आने दो, फल जरूर होगा।" 2028 तक मध्य प्रदेश की हर पंचायत आत्मनिर्भर और सशक्त होगी। यह अब सिर्फ सपना नहीं, सरकारी संकल्प है।

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