भोपाल सांसद के गोद लिए हुए गांव में लोग बेच देते हैं अपनी बेटियां, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बड़ा बयान
भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि मेरे गोद लिए गांव में ऐसी कुछ बस्तियां हैं। जिनमें ऐसे लोग रहते हैं जिनके पास ना पढ़ने का साधन है और ना ही उनके माता-पिता के पास कोई कमाई का साधन है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उनक
भोपाल 20 सितंबर। अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाली भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बार फिर ऐसा ही एक बयान दिया है। उनके इस बयान ने पुलिस प्रशासन और सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। दरअसल भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि मेरे गोद लिए गांव में ऐसी कुछ बस्तियां हैं। जिनमें ऐसे लोग रहते हैं जिनके पास ना पढ़ने का साधन है और ना ही उनके माता-पिता के पास कोई कमाई का साधन है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उनको गोद लिया है। वह लोग कच्ची शराब बनाने और बेचने का काम करते हैं। उन्हें कभी-कभी पुलिस पकड़ कर ले जाती है। लेकिन उनको छुड़ाने के लिए उनके परिवार वालों के पास पैसे नहीं होते तो वह अपनी मासूम बच्चियों को बेच देते हैं और फिर उससे वे अपने लोगों को छुड़वाते हैं।
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वहीं कांग्रेस ने सांसद के बयान पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने सांसद के बयान पर सरकार की योजनाओं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिए। मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष संगीता शर्मा ने कहा कि भाजपा की सांसद खुद उनकी सरकार के 18 साल के काम और उनके दावों की पोल खोल रही है।
संगीता शर्मा ने कहा कि भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान से पता चलता है कि 3 बस्तियों को उन्होंने गोद ले रखा है। इन बस्तियों में लोगों के पास ना खाने का पैसा है, ना शिक्षा का कोई साधन है। वे कच्ची शराब बनाकर बेचते हैं और उसके बाद जब पुलिस उन्हें पकड़ लेती है तो उन्हें अपनी 5 से 6 साल की बच्चियों को बेचकर लोगों को छुड़वाना पड़ता हैं,यह सब बहुत दुखद है।
बता दे सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर शनिवार को व्यापारियों के संगठन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल मध्यप्रदेश के कार्यक्रम में शामिल होने पूछी थी। भोपाल सांसद के गोद लिए गांव के बच्चों के लिए संगठन ने सामग्री भेंट की थी। इसी दौरान मंच से संगठन का आभार जताने के लिए सांसद ने उनकी पीड़ा बता दी। उन्होंने कहा कि उन गांवों में लोगों की इतनी बुरी हालत है कि वहां खाने पीने को भी कुछ नहीं है। मैंने जिन तीन गांवों को गोद लिया उनमें लगभग 250 से 300 बच्चे हैं। उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। इसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया।












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