Bhopal: मुसलमान बनने से पहले दिया था चांसलर बनाने का लालच, सलीम के पिता बोले- सौरभ ने फोन पर किए थे कई खुलासे
एचयूटी संगठन से जुड़े संदिग्ध आरोपी मोहम्मद सलीम उर्फ सौरभ के पिता अशोक राजवैद्य ने सौरभ के धर्मांतरण करने को लेकर कई राज खोले हैं। उन्होंने बताया कि 1 साल पहले सौरभ ने मुझे फोन किया था उसने बताया था कि कैसे उसे लालच दिय

Bhopal Hut News: एमपी एटीएस की कार्रवाई में पकड़े गए संदिग्ध आतंकी मोहम्मद सलीम उर्फ सौरभ राजवैद्य के पिता उसके धर्मांतरण को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सौरभ के पिता अशोक राजवैद्य ने बताया कि सौरभ को धर्मांतरण करने के लिए बड़े-बड़े प्रलोभन दिए गए। उसे चांसलर बनाने का लालच दिया गया था।
सौरभ के मतांतरण की पूरी कहानी
भोपाल बैरसिया के रहने वाले अशोक राजवैद्य ने बताया कि उनके परिवार में चार बेटियों के पास सौरभ का जन्म हुआ था। हमने उसे अच्छे संस्कार दिए। उसे हिंदू धर्म के बारे में भी अच्छी शिक्षा दी। लेकिन पता नहीं था कि बेटा इस तरह से धर्म परिवर्तित करके ऐसा मुस्लिम बन जाएगा। बता दे सौरभ उर्फ मोहम्मद सलीम को मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (MP ATS) ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिज्ब उत तहरीर के सदस्य होने और भोपाल के लड़कों को इसमें जोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
अशोक राजवैद्य बैरसिया के हरसिद्धि मंदिर के पास रहते हैं। उन्होंने बताया कि सौरभ के साथ उसकी पत्नी और 5 दोस्तों सहित कई लोगों ने धर्मांतरण किया था। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की लेकिन तब प्रदेश में मतांतरण कानून नहीं होने से पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस ने उनके वयस्क होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए।
2010 में मुस्लिम बन गया था सौरभ
पिता अशोक राजवैद्य ने बताया कि सौरभ ने मुसलमान बनने के बाद हमसे यह बात छुपाई थी। उसने 2010 में ही मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था। लेकिन हमें 2012 में पता चला। मैंने कई बार पूछा कि सनातन धर्म में तुमको क्या समस्या है। सौरभ जवाब देने की जगह बहस करने लगता था। वह तो मुझे भी मुस्लिम बनाने के लिए जिद कर रहा था। सौरभ की पत्नी तो मुझे कहती थी कि पिताजी वहां बहुत प्रेम है और सौरभ कहने लगा मैं जन्नत में रहूंगा। आप दोजख में रहोगे, यह देख नहीं सकूंगा। इसलिए आप भी इस्लाम स्वीकार कर लो।
प्रोफेसर कमाल और मानसी व सौरव एक ही कॉलेज में थे
भोपाल के निजी कॉलेज से बी-फार्मा करने के बाद सौरभ ने कर्नाटक के हुगली से एम-फार्मा किया था। उसे भोपाल में ही नौकरी मिल गई थी जिस कॉलेज में सौरभ था। उसी कॉलेज में मानसी अग्रवाल रजिस्ट्रार का काम करती थी। 1 दिन सौरभ और मानसी की बहस होने के बाद सौरभ ने कॉलेज छोड़ दिया था। इसके बाद सौरभ ने दूसरा कॉलेज ज्वाइन किया। जहां पर संयोगवश मानसी और प्रोफ़ेसर कलाम भी उसी कॉलेज में नौकरी करने आ गए। प्रोफ़ेसर कमाल नहीं यहीं से सौरभ को अपनी मीठी-मीठी बातों में उलझाना शुरू किया।
चांसलर बनाने का दिया लालच
पिता ने बताया कि मोहम्मद सलीम बनने से पहले सौरव को मानसी से प्यार हो गया था और उसने हम से जिद करके मानसी से शादी भी कर ली। इसी शादी के प्रोग्राम में प्रोफेसर कमाल और उसका पूरा गैंग शामिल होने आया था। सौरभ की सीखने की कला अच्छी थी। इसी बात का फायदा उठाकर कमाल ने सौरव को जाकिर नाइक के वीडियो दिखाना शुरू किए। इसके बाद उसने सौरभ को जाकर नाइक से भी मिलवाया। जहां सौरभ से कहा गया कि तुम्हें प्रिंसिपल क्या चांसलर बनवाएंगे। इस तरह सौरभ उनके चंगुल में फंसता चला गया।
1 साल पहले सौरभ ने फोन पर खोले कई राज
पिता अशोक राज वेद ने बताया कि सौरभ ने 1 साल पहले मुझसे फोन पर कहा कि धर्म बदलने तक कई लालच दिए जाते हैं, लेकिन बाद में हमेशा खुद को पक्का मुसलमान साबित करने को कहा जाता है। बिहार से आने वालों पर भरोसा नहीं करते फिर उसने मतांतरित लोगों का संगठन बनाया। शायद यही से उन्होंने उसे किनारे लगाने का मन बना लिया मेरी युवाओं के लिए यह सलाह है कि किसी के बहकावे में नहीं आए।












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