Singrauli: भू-माफियाओं में हड़कंप, 55 से अधिक गांवों की जमीन बिक्री पर लगा प्रतिबंध
सिंगरौली, 30 सितंबर। जिले में विस्थापन की प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए मुआवजा बटोरने वाले भू माफिया अब आगे अपनी मंशा में सफल नहीं हो सकेंगे। विस्थापन को अवसर बनाने वाले भू माफियाओं पर नकेल कसने के लिए डीएम ने उन क्षेत्रों में जमीन की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है जहां से लोगों को कोल ब्लॉक सहित अन्य कारणों से निकट भविष्य में विस्थापित किया जाना है।

आदेश के मुताबिक, नगर निगम क्षेत्र के मुहेर,गहिलगढ़ पश्चिम, बलियरी, पिपराकुरंद, मेढौली,चटका और पंजरेह के बड़े रकबे को बिक्री के लिए प्रतिबंधित किया है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में पचौर, देवरी, बांसीबेरदहा, बेलवार, बंधा, तेंदुहा, अमरई खोह सहित अन्य गांवों पर भी प्रतिबंध प्रभावी है। इन गांवों में जमीन की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध लगने के बाद भू-स्वामियों के साथ उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो विस्थापन की प्रक्रिया को मुआवजा पाने धंधा बना चुके हैं।
सिंगरौली डीएम राजीव रंजन मीना जानकारी दी कि कुछ कारणों से कई क्षेत्रों में जमीन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाना पड़ा है। विशेष आवश्यकता वाले भूमि मालिक परमिशन लेकर जमीन की बिक्री कर सकते हैं।
कोरावल क्षेत्र के लोगों ने किया विरोध
चितरंगी में बगदरा अभयारण्य से सटे क्षेत्र के कोरावल इलाके में जमीन की खरीद व बिक्री पर प्रतिबंध है। वहां वैसे तो अभ्यारण्य प्रभावित दर्जन भर गांव प्रतिबंध की श्रेणी में रखे गए हैं, लेकिन जिला प्रशासन ने 55 से अधिक ग्राम पंचायतों में जमीन पर बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे समस्या खड़ी हो गई है। इस पर भूमि मालिकों ने आपत्ति लगाई है।
भू माफिया ऐसे बनवाते थे मुआवजा
भू माफिया इस खबर की सुराग में लगा रहता है कि किस गांव में विस्थापन होना है। सूचना मिलने पर न केवल पर्याप्त रकबा की जमीन रजिस्ट्री कराई जाती है, बल्कि वहां दिखावे का आवास बनाते हुए रहवास दिखाया जाता है। प्रक्रिया शुरू होने पर अधिकारियों से साठगांठ कर करोड़ों का मुआवजा बनवा लिया जाता है। इससे मूल रहवासियों का हित प्रभावित होता है।












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