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MP news: जानिए फेसम DSP संतोष पटेल के नाम पर कैसे हुई 72 लाख ठगी, लाखों फॉलोअर्स का उठाया फायदा

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक शर्मनाक फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स वाले वायरल DSP संतोष पटेल के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर छत्तीसगढ़ की एक आदिवासी महिला से 72 लाख रुपये ठग लिए गए।

पीड़िता ललकी बाई (नाम परिवर्तित) ने अपने बेटों को पुलिस में नौकरी दिलाने के लालच में चार साल तक पैसे दिए, लेकिन सच्चाई सामने आने पर पता चला कि ठग एक JCB ऑपरेटर था, जो 2016 से DSP की पहचान चुराकर ठगी कर रहा था। पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने 12 नवंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया।

72 lakh rupees fraud in the name of DSP Santosh Patel tribal woman from Chhattisgarh targeted

असली DSP संतोष पटेल, जो बालाघाट हॉक फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट हैं, ने वीडियो कॉल पर पीड़िता से बात की, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुई। यह मामला न केवल साइबर ठगी की गहराई दर्शाता है, बल्कि सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के खतरे को भी उजागर करता है। आइए, जानते हैं इस ठगी की पूरी साजिश, पीड़िता की शिकायत से गिरफ्तारी तक का सफर।

मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं - 2025 में 1,500+ शिकायतें, 200 करोड़+ का नुकसान। यह केस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की लोकप्रियता का दुरुपयोग दिखाता है। DSP पटेल के 2.2 मिलियन फॉलोअर्स ने उन्हें 'वायरल पुलिस अधिकारी' बनाया, लेकिन ठग ने इसी का फायदा उठाया।

ठगी की शुरुआत: 2016 में JCB साइट पर मुलाकात, नौकरी का लालच

कहानी की शुरुआत 2016 से है। आरोपी संतोष पटेल (सिर्फ नाम समान, कोई रिश्ता नहीं), सिद्दी जिले के चुरहट का रहने वाला एक JCB ऑपरेटर था। वह छत्तीसगढ़ के बालरामपुर जिले में सड़क निर्माण साइट पर काम कर रहा था। वहां बकरी चराने वाली आदिवासी महिला ललकी बाई से उसकी मुलाकात हुई। ठग ने बताया कि वह बालरामपुर के पास काम करता है और पुलिस अधिकारी का रिश्तेदार है। धीरे-धीरे बातें बढ़ीं, और ठग ने ललकी के दो बेटों को 'पुलिस में नौकरी' दिलाने का वादा किया।

ललकी, जो गरीब आदिवासी परिवार से हैं, ने भरोसा किया। ठग ने खुद को DSP संतोष पटेल बताया - असली DSP की फोटो (वर्दी वाली) सोशल मीडिया से ली और व्हाट्सएप पर इस्तेमाल किया। 2016 से 2025 तक चार सालों में ठग ने विभिन्न बहानों से पैसे ऐंठे:

शुरुआती रकम: भर्ती फॉर्म, ट्रेनिंग फीस - 5-10 लाख।

  • बाद में: 'ऊपरी अधिकारियों को रिश्वत', 'मेडिकल टेस्ट', 'ट्रांसफर' - कुल 72 लाख।
  • तरीका: व्हाट्सएप वॉइस कॉल (चेहरा न दिखाकर), UPI ट्रांसफर। ठग ने कभी वीडियो कॉल नहीं की।

ललकी ने बताया, "उसने कहा कि DSP साहब हैं, बेटों को MP पुलिस में लगवा देंगे। मैंने खेत, बकरी बेचकर पैसे दिए।"

पीड़िता की शिकायत: कुसमी थाने में FIR की मांग, पुलिस ने कहा 'पहले जांच'

जुलाई 2025 में जब पैसे रुके और नौकरी न मिली, तो ललकी ने बालरामपुर के कुसमी थाने में DSP संतोष पटेल के खिलाफ FIR की मांग की। लेकिन नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत पुलिस ने कहा, "पहले प्रारंभिक जांच होगी, फिर FIR।" ललकी को लगा कि पुलिस जानबूझकर टाल रही है।

दो महीने (सितंबर 2025) इंतजार के बाद ललकी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और छत्तीसगढ़ CM विष्णु देव साय को विस्तृत शिकायत भेजी। शिकायत में ठग के व्हाट्सएप चैट, UPI ट्रांजेक्शन और DSP की फोटो संलग्न की।

PMO का हस्तक्षेप: छत्तीसगढ़ पुलिस बालाघाट पहुंची, असली DSP का झटका

PMO से आदेश आने के बाद कुसमी पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की। पता चला कि असली DSP संतोष पटेल बालाघाट हॉक फोर्स (विशेष सुरक्षा बल) में असिस्टेंट कमांडेंट हैं। पुलिस टीम बालाघाट पहुंची और पटेल को दस्तावेज दिखाए। दस्तावेजों में उनकी वर्दी वाली फोटो देख पटेल सन्न रह गए। उन्होंने कहा, "मैंने महिला से कभी बात नहीं की, न पैसे मांगे। यह मेरी पहचान का दुरुपयोग है।"

पटेल, जो MPPSC 2017 से DSP बने और गरीबी से उठे 'वायरल ऑफिसर' हैं, ने सोशल मीडिया पर अपील की: "लोग सावधान रहें। फर्जी कॉल्स से बचें।" उनके 2.2 मिलियन फॉलोअर्स ने पोस्ट शेयर की।

वीडियो कॉल पर ड्रामा: पीड़िता ने असली DSP को ही ठग बताया

पुलिस ने पीड़िता को असली DSP से वीडियो कॉल कराई। लेकिन ललकी ने कहा, "तुमने ही पैसे लिए हैं। फोन पर कभी चेहरा नहीं दिखाते थे, आज पुलिस है इसलिए दिखा रहे हो।" यह बात पुलिस के लिए सबूत बनी - ठग ने हमेशा वॉइस कॉल की, चेहरा छिपाया।

जांच में ठग की लोकेशन सिद्दी जिले के पदखुरी पचोखर गांव में ट्रेस हुई। 12 नवंबर को छत्तीसगढ़ पुलिस ने MP पुलिस के साथ मिलकर आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके फोन से 50+ ठगी केस मिले।

ठगी का तरीका: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पहचान का दुरुपयोग

कैसे ठगा: DSP की फोटो प्रोफाइल पर लगाई, वॉइस चेंजर यूज। 'पुलिस भर्ती' का लालच।
लाभ: लाखों फॉलोअर्स से विश्वास। पटेल के वीडियो शेयर कर 'असली' साबित किया।
अन्य पीड़ित: जांच में 10+ महिलाएं मिलीं, जो 10-20 लाख ठगे गईं।

पुलिस का पक्ष: BNS के तहत प्रक्रिया, लेकिन तेजी की जरूरत

कुसमी थाना प्रभारी ने कहा, "BNS में पहले जांच जरूरी। लेकिन PMO से तेजी आई।" असली DSP पटेल ने कहा, "मेरी पहचान का दुरुपयोग दुखद। लोग वेरिफाई करें।"

प्रतिक्रियाएं: साइबर जागरूकता की अपील

  • PMO: "तेज जांच के निर्देश।"
  • CM विष्णु देव साय: "ठगी रोकने के लिए कैंपेन।"
  • कांग्रेस: "पुलिस की सुस्ती। BNS का दुरुपयोग।"
  • साइबर सेल MP: "सोशल मीडिया वेरिफिकेशन बढ़ाएंगे।"

आगे की राह: आरोपी पर केस, जागरूकता अभियान

आरोपी पर BNS धारा 318 (धोखाधड़ी), 336 (इम्पर्सनेशन) के तहत केस। रिमांड में। पटेल ने वीडियो जारी: "सावधान रहें।" साइबर सेल ने हेल्पलाइन 1930 पर अपील की।

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