छिंदवाड़ा समेत पूरे MP में जहरीली सिरप से 16 बच्चों की मौत, जीतू पटवारी ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' के कारण 16 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को शोक और आक्रोश में डुबो दिया है। इस त्रासदी को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने "सरकारी हत्या" करार देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने इसे भाजपा सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और दवा माफिया से सांठगांठ का परिणाम बताया। आज परासिया में पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद पटवारी ने फव्वारा चौक पर एक दिवसीय अनशन में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी।

परासिया में शोक और आक्रोश: अनशन में उमड़ा जनसैलाब
छिंदवाड़ा के परासिया में आयोजित अनशन में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक और नेता शामिल हुए। जुनार्देव विधायक सुनील उइके, परासिया विधायक सोहन वाल्मीक, पांढुर्णा विधायक निलेश उइके, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद तिवारी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे, पूर्व विधायक संजय शर्मा, निलय डागा सहित कई नेता मौजूद रहे। अनशन के दौरान दो मिनट का मौन रखकर मृत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। पटवारी ने शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा साझा की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। इसके बाद, वे नागपुर में भर्ती बच्चों से मिलने रवाना हुए।
"यह सरकारी हत्या है": जीतू पटवारी का तीखा हमला
अनशन को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा, "छिंदवाड़ा, परासिया, चौरई और सौंसर के 16 मासूमों की मौत ने हम सबके दिल को झकझोर दिया है। यह दुर्घटना नहीं, सरकारी हत्या है। दवा बेचने वाले, स्वास्थ्य कमिश्नर, स्वास्थ्य मंत्री और ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।" उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बयान पर निशाना साधते हुए कहा, "मंत्री जी ने बिना जांच के सिरप को क्लीन चिट दे दी। यह कमीशन की दुकान चलाने का प्रयास था। मुख्यमंत्री को तुरंत उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।"
पटवारी ने मुख्यमंत्री पर भी हमला बोला: "मोहन यादव अपने पाप छिपाने के लिए डॉक्टर को बलि का बकरा बना रहे हैं। डॉक्टर ने सिर्फ दवा लिखी, लेकिन मिलावट के लिए सरकार जिम्मेदार है। छिंदवाड़ा के सांसद क्रिकेट खेलते रहे, गरबा में नाचते रहे, लेकिन 25 किमी दूर पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं आए।" उन्होंने मध्य प्रदेश को "अमानक दवाओं का सबसे बड़ा केंद्र" बताया और पिछले दो वर्षों में नवजातों की संदिग्ध मौतों की जांच की मांग की।

कमल नाथ और नकुल नाथ पर सवाल, फिर भी समर्थन
पटवारी ने कहा, "छिंदवाड़ा कमल नाथ जी और नकुल नाथ जी का परिवार है। यहां की विपदा उन्हें विचलित करती है।" हालांकि, उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कमल नाथ और नकुल नाथ की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, लेकिन इसे राजनीति से जोड़े बिना कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, "कांग्रेस आमजन की पार्टी है। यह प्रदेश के भविष्य का सवाल है। हम सड़क से सदन तक सरकार को जवाबदेह बनाएंगे।" पटवारी ने भोपाल पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात और मुख्यमंत्री से चर्चा की योजना बताई।
कांग्रेस की मांगें: सजा, मुआवजा और जांच
- दोषियों पर कठोर कार्रवाई: दवा निर्माता (श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स), वितरक, स्वास्थ्य कमिश्नर, स्वास्थ्य मंत्री और ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
- स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी: गैर-जिम्मेदार बयानों और लापरवाही के लिए तत्काल हटाया जाए।
- पर्याप्त मुआवजा: प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और शेष बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। वर्तमान 4 लाख रुपये अपर्याप्त।
- स्वतंत्र जांच: SIT गठन कर दवा निर्माण, वितरण, गुणवत्ता नियंत्रण और सरकारी निगरानी की जांच हो। पिछले दो वर्षों की नवजात मृत्यु भी जांच के दायरे में आए।
त्रासदी की पृष्ठभूमि: लापरवाही का खुलासा
छिंदवाड़ा में अगस्त 2025 से शुरू हुई इस त्रासदी में कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मौजूदगी पाई गई, जो किडनी फेलियर का कारण बनी। जांच में सिरप में 48.6% DEG पाया गया, जो वाहन उद्योग में इस्तेमाल होने वाला विषैला रसायन है। पहली मौत के बाद भी सिरप पर बैन में देरी हुई, जिससे 16 बच्चों की जान गई। स्वास्थ्य मंत्री ने बिना जांच के सिरप को सुरक्षित बताया, लेकिन बाद में जांच में खामियां सामने आईं। ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि तमिलनाडु सरकार की चेतावनी को अनदेखा किया गया।
जन आंदोलन की चेतावनी
पटवारी ने कहा, "कांग्रेस हर शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है। यदि सरकार ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो हम पूरे प्रदेश में जन आंदोलन छेड़ देंगे। लोग सरकार की लापरवाही पर गुस्सा जता रहे हैं। अनशन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दोषियों को सजा और पीड़ितों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया।
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