चंबल में बदलाव की बयार, जिला पंचायत की 21 में से 16 सीटों पर महिलाओं का कब्जा
भिंड में बदलाव की बयार चल रही है, जिला पंचायत के चुनाव में 21 में से 16 सीटों पर महिला प्रत्याशी जीत कर आई हैं।
भिंड, 16 जुलाई। भिंड में हुए पंचायत चुनाव में आए नतीजों ने चंबल की बदलती तस्वीर दुनिया के सामने लाकर रख दी है। क्यों कि इस बार जिला पंचायत चुनाव में 21 में से 16 सीटों पर महिला प्रत्याशी विजई हुई है। महिलाओं के बढ़ते हुए इस जनाधार से चंबल में बदलाव की बयार का पता लग रहा है।

चंबल में महिलाओं की स्थिति रही है दयनीय
चंबल में महिलाओं की स्थिति हमेशा दयनीय बनी रही है। चंबल में घूंघट की ओट में ही महिलाओं का सारा जीवन निकल जाया करता था। महिला अत्याचार के मामलों में भी चंबल अव्वल रहा है। लेकिन अब बदलते वक्त के साथ महिलाओं की स्थिति में भी बदलाव आ रहा है। अब महिलाएं घूंघट से निकल बाहर आ रही हैं और राजनीति में उतर कर इस समाज में अपने वजूद को पहचान दे रहीं है।

पैदा होते ही कर दी जाती थी बच्चियों की हत्या
चंबल अंचल में बच्ची पैदा होना अभिशाप माना जाता था। बच्ची के पैदा होते ही उसे खत्म कर दिया जाता था। यहां तक कि बच्ची की नाक में तंबाकू भरकर उसकी सांसें रोक दी जाती थी। भिंड के खरूआ गांव में इस तरह की घटना सामने भी आ चुकी है। पुलिस की जानकारी में आने पर ऐसे मामलों पर कार्रवाई भी की जाती रही है लेकिन चंबल में बेटियों की स्थिति दयनीय ही बनी रही।
शिक्षा का स्तर बढ़ने से लोगो में आई जागरुकता
समय के साथ समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ने से लोगों मे जागरुकता आने लगी है। कल तक बेटियों को अभिशाप समझने वाला समाज अब बेटियों को वरदान मानने लगा है। बेटी के पैदा होने पर अब खुशियां मनाई जाने लगी है। बेटियों को अब बेटों की तरह शिक्षित भी किया जा रहा है। बेटियों को लेकर अब लोगों की सोच बदलने लगी है।
राजनीति में भी चंबल की महिलाएं बढ़ाने लगी कदम
राजनीति के आंगन में अब चंबल की महिलाएं अपने कदम ऱखने लगी है। इस बार हुए चुनाव में पंच, सरपंच, जनपद और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव ये बताता है कि चंबल की राजनीति में महिलाओं की बहुत जबरदस्त एंट्री हो चुकी है।
जिला पंचायत की 21 में से 16 सीटों पर महिलाओं की जीत दर्ज
इसे आप चंबल की बदलती बयार ही कहेंगे कि इस बार हुए जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कुल 21 वार्ड में से 16 वार्ड पर महिलाओं ने जीत दर्ज की है। ऐसा पहली बार हुआ है जब चंबल की राजनीति में महिलाओं की इतनी बढ़ी भागीदारी देखने को मिली है। महिलाओं को आगे लाने की सरकार की सोच और जनता में बढ़ती हुई जागरुकता नें महिलाओं के लिए अब तमाम रास्ते खोल दिए है।
कभी लिंगानुपात में पिछड़ी थी आज राजनीति में है आगे
भिंड जिले में बेटियां एक समय लिंगानुपात में काफी पिछड़ी हुई थी। यहां 1000 बेटों पर 839 बेटियां ही दर्ज थी लेकिन समय के साथ अब चंबल में भी सबकुछ बदल रहा है। नई सोच, नई विचारधारा ने चंबल में महिलाओं को एक नया मुकाम दिया है। अब जिला पंचायत पर महिलाओं की ही सरकार है जो भिंड के लिए काफी शुभ संकेत है।












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