क्या कर्नाटक कांग्रेस में 'कलह' की शुरुआत? डीके बोले- "सिद्धारमैया डरे हुए थे, अगर मैं होता..."

DK Shivakumar vs Siddaramaiah: क्या कर्नाटक में 'कलह' की शुरुआत हो रही है? ये सवाल इसलिए क्योंकि डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री के डर को लेकर बयान दिया है। डीके शिवकुमार ने कहा, "सिद्धारमैया डरे हुए थे, अगर मैं होता तो पीछे नहीं हटता।"

डीके शिवकुमार सिद्धारमैया की कैबिनेट में डिप्टी सीएम होने के अलावा कर्नाटक में कांग्रेस प्रमुख भी हैं। बता दें कि कर्नाटक में चुनाव जीतने के बाद दोनों के बीच सीएम पद को लेकर खींचतान की अटकलों वाली मीडिया रिपोर्ट सामने आई थीं। दोनों के कई बार दिल्ली दौरे के बाद सिद्धारमैया को गद्दी सौंपी गई।

DK Shivakumar vs Siddaramaiah

इसके बाद भी सियासी पंडितों ने इसे डैमेज कंट्रोल की तरह देखा। अब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की डर वाली टिप्पणी ने एक बार फिर कर्नाटक कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं।

नाजुक स्थिति से गुजर रही कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख के बयान से दक्षिण भारतीय राज्य के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रही है। शिवकुमार ने कहा है कि वह एक ऐसी परियोजना के साथ आगे बढ़ सकते थे जिसे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने पिछले कार्यकाल में आगे बढ़ाने से "डर" रहे थे।

विजयनगर साम्राज्य के दौरान एक सरदार केम्पेगौड़ा प्रथम की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में विधानसभा में शिवकुमार ने कहा कि उन्हें सुरंगों और फ्लाईओवर के निर्माण के लिए कई अनुरोध मिलते हैं।

परियोजनाओं को लागू करने में चुनौतियों का जिक्र करते हुए डीके ने कहा, "2017 में, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और केजे जॉर्ज, जो तत्कालीन बेंगलुरु शहर विकास मंत्री थे। शहर में एक स्टील फ्लाईओवर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से डरे हुए थे। अगर मैं होता, तो मैं पीछे नहीं हटता। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के शोर के आगे घुटने टेक दिए।"

कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार की इस टिप्पणी के बारे में एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बयान के समय सिद्धारमैया मौजूद नहीं थे। उपमुख्यमंत्री डीके का बयान ऐसे समय में आया है जब चुनावी जीत के बाद सरकार का गठन हुए बमुश्किल एक महीने हुए हैं।

खबरों के अनुसार, सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों मुख्यमंत्री पद चाहते थे। कांग्रेस आलाकमान के साथ कई दौर की बातचीत के बाद शिवकुमार को पीछे हटना पड़ा और आलाकमान के फैसले को स्वीकार कर उन्होंने इसकी तुलना "अदालत में एक न्यायाधीश के फैसले" से की।

शिवकुमार की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर, राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि सिद्धारमैया डर गए। मुख्यमंत्री जनता की राय के प्रति संवेदनशील हैं।

उन्होंने कहा, कभी-कभी, झूठी बातें सामने आती हैं और अच्छे निर्णयों में देरी होती है। मुझे लगता है कि उपमुख्यमंत्री का यही मतलब था। बता दें कि खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे भी हैं।

सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों सरकार में शामिल हैं, लेकिन विपक्षी दल भाजपा कई बार कह चुकी है कि सरकार के भीतर दरारें बढ़ना और सरकार का गिरना में केवल समय की बात है।

कुछ दिन पहले, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ किसी भी कदम के खिलाफ कांग्रेस को चेतावनी दी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री आर अशोक ने कहा था, "सीएम सिद्धारमैया चुप हैं लेकिन डिप्टी सीएम शिवकुमार बेहद आक्रामक हैं। हर बैठक में शिवकुमार सीएम से पहले बोलते हैं।"

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