सुप्रीम कोर्ट ने रोकी रेपिस्ट की पैरोल, वंश वृद्धि के लिए 15 दिन पत्नी संग रहने की हाईकोर्ट से ली थी मंजूरी
राजस्थान के अलवर जिले में रेप के एक आरोपी की पैरोल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। कोर्ट ने आरोपी को पत्नी के साथ रहकर वंश वृद्धि के लिए 15 दिन की पैरोल मंजूर की थी। रेपिस्ट को पैरोल पर छोड़ने के लिए राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आरोपी की पैरोल पर रोक लगा दी।

मीडिया की खबरों के अनुसार राज्य सरकार की ओर से मामले में पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट मनीष सिंघवी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने रोक लगाई है। राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दस नवंबर को अपील दायर की गई थी।
बता दें कि राहुल की शादी साल 2018 में बृजेश देवी के साथ हुई थी। इनके कोई संतान नहीं है। पति के रेप केस में जेल जाने पर पत्नी बृजेश देवी ने वंश वृद्धि का हवाला देकर बच्चा पैदा करने के अपने मौलिक एवं संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए अलवर के DJ कोर्ट में 13 जुलाई 2022 को इमरजेंट पैरोल (आपात पैरोल) याचिका लगाई।
आरोपी की पत्नी ने 30 दिन की पैरोल मांगी थी, जिस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राहुल को 15 दिन के पैरोल पर छोड़ने का आदेश सुनाया। याचिका में उसने कहा था कि पत्नी को प्रेग्नेंसी या दंपती को वंश बढ़ाने के लिए रोकना संविधान के आर्टिकल 14 और 21 की भावना के खिलाफ होगा। अलवर के DJ कोर्ट में याचिका लगाने के बाद 7 दिन तक सुनवाई का इंतजार किया। फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
शुक्रवार को याचिका पर राज्य सरकार ने एडवोकेट ने पहली सुनवाई में दलील दी कि 'राइट टू पैरोल' कोई मौलिक अधिकार नहीं है। राजस्थान में यह पहला फैसला है, जिसमें रेप के किसी दोषी को पैरोल मिली है। राजस्थान के पैरोल रूल्स में रेप या गैंगरेप के मामलों में पैरोल नहीं मिल सकती है। न ही ऐसे दोषियों को ओपन जेल में भेजा जा सकता है। इस पर सर्वोच्च अदालत की खंडपीठ ने पैरोल पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन लगा दिया है।












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