हाईकोर्ट ने खारिज की UPPSC की पूर्व परीक्षा नियंत्रक अंजू लता कटियार की जमानत अर्जी

प्रयागराज। एलटी ग्रेड पेपर लीक मामले में जेल में बंद उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की पूर्व परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी एसटीएफ और राज्य सरकार की उस मांग को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने जांच पूरी करने के लिए 30 दिन की मोहलत मांगी है।

एसटीएफ ने मांगा समय

एसटीएफ ने मांगा समय

एसटीएफ की ओर से कहा गया है कि इस गंभीर मामले में जमानत मिलने के बाद जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए जांच के लिए बची समयावधि तीस दिन तक के लिए जमानत न दी जाए। जिसे कोर्ट ने इस आधार पर स्वीकार कर लिया कि इस अवधि में जांच एजेंसी अंजू लता कटियार और दूसरे आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटा सकती है। जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए एक माह बाद नए सिरे से जमानत याचिका दाखिल करने को कहा है।

गैंग का एक सदस्य बना सरकारी गवाह

गैंग का एक सदस्य बना सरकारी गवाह

एसटीएफ के अनुसार आयोग की परीक्षाओं के पेपर लीक करने व धांधली कर लोगों को नौकरी दिलाने के लिये एक बहुत बड़े गैंग के सक्रिय होने की पूरी कड़िया लगभग जुड़ गयी है। इस गैंग के सक्रिय सदस्य रहे अशोक देव चौधरी की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने उसे सरकारी गवाह बना लिया है और पूरे खुलासे व सुबूतों को जुटने में चौधरी ही मुख्य कड़ी बना हुआ है। फिलहाल चौधरी के सरकारी गवाह बन जाने के कारण परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की मुश्किल और बढ़ गयी है। इस मामले में एसटीएफ की एक टीम को कोलकाता भी भेजा गया है।

गैंग का मास्टर माइंड भी हिरासत में

गैंग का मास्टर माइंड भी हिरासत में

एसटीएफ ने गैंग के मास्टर माइंड कौशिक कुमार को 27 मई की रात चोलापुर से गिरफ्तार किया गया था। कौशिक ही कोलकाता के उस प्रिंटिंग प्रेस का मालिक है, जहां एलटी ग्रेड परीक्षा का पेपर छपा था। इतना ही नहीं कई अन्य परीक्षाओं के पेपर भी इसी जगह छपे हैं। पूर्व में शिकायत के बाद इस प्रेस पर शिकंजा कसने वाला था और गोपनीयता भंग आदि करने के मामले में कार्रवाई भी होती। लेकिन परीक्षा नियंत्रक अंजू की विशेष कृपा प्राप्त कौशिक को दागी होने के बावजूद न सिर्फ काम मिलता रहा, बल्कि वह नौकरी देने के लिये एक पूरा नेटवर्क चलाता रहा। अब एसटीएफ इसी पूरे मामले की कड़ियां जोड़कर बड़े खुलासे की ओर बढ़ रही है।

30 मई को अंजू लता को किया था गिरफ्तार

30 मई को अंजू लता को किया था गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को प्रयागराज स्थित मुख्यालय से एसटीएफ ने एलटी ग्रेड परीक्षा पेपर लीक मामले में 30 मई को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ पेपर लीक करने वाले गैंग के सरगना व प्रिंटिंग प्रेस के संचालक ने बयान दिया और दस लाख देने की बात कहीं है। इसी मामले में लगभग 10 घंटे तक अंजू से एसटीएफ ने कड़ी पूछताछ की और सवालों का जवाब न दे पाने पर मोबाइल फोन व लैपटॉप आदि जब्त कर लिया था। मोबाइल व लैपटाप में अंजू की संलिप्तता पेपर लीक कांड से जुड़ी हुई पाई गयी है, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर वाराणसी की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया है। इसमें एसटीएफ ने दावा किया है कि उनके पास अंजूलता कटियार और कौशिक कुमार की मिलीभगत के साक्ष्य हैं। इसी मामले में अंजू लता को सस्पेंड कर दिया गया है।

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