जिले का नाम है प्रयागराज, शहर का नाम अभी भी इलाहाबाद: योगी सरकार

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले का नाम पिछले दिनों शासनादेश के अनुसार प्रयागराज किया जा चुका है। जबकि इलाहाबाद मंडल का भी नाम प्रयागराज मंडल कर दिया गया है। इसके लिए बकायदा सरकारी अधिसूचना जारी की जा चुकी है और सरकारी कार्यालय, संस्थान में लगे सूचना पट्ट भी बदलने का कार्य चल रहा है। योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नाम बदलने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं के सापेक्ष ऐसी दलील दी है जिसने सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है, साथ ही आने वाले दिनों में मामले के सुर्खियां बटोरने की संभावनाओं को भी तैयार कर दिया है। हाईकोर्ट में योगी सरकार ने कहा है कि इलाहाबाद जिला का नाम प्रयागराज व इलाहाबाद मंडल का नाम प्रयागराज मंडल किया गया है। शहर का नाम अभी भी इलाहाबाद है।

क्या है मामला

क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद में अपने दौरे के दौरान घोषणा की थी कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया जाएगा और उनके इस प्रस्ताव पर राज्यपाल राम नाईक ने मुहर भी लगा दी थी। इसी अनुक्रम में सरकारी शासनादेश जारी हुआ और बकायदा इलाहाबाद जिले को प्रयागराज कर दिया गया। इसी कड़ी में इलाहाबाद मंडल को भी प्रयागराज मंडल के नाम की सरकारी अधिसूचना जारी कर दी गई। परन्तु सरकार के इस फैसले के विरुद्ध कुछ लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाया। हालांकि हाईकोर्ट ने शुरुआत में आई याचिकाओं को खारिज कर दिया और इसे सरकार के पाले में डाल दिया। इस मामले पर लगातार और याचिकाएं दाखिल हुई तो हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की। जिस पर अब सरकार ने जवाब दे दिया है कि इलाहाबाद जिला व इलाहाबाद मंडल का नाम प्रयागराज किया गया है।

हाईकोर्ट में क्या हुआ

हाईकोर्ट में क्या हुआ

इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी सहित कई संगठनों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई शुरू की तो कोर्ट को बताया गया कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की नियमावली को आधार बनाया गया। बिना नियमावली के पालन के ही नाम बदल दिया गया जिसके कारण नाम बदलने की यह पूरी प्रक्रिया वैधानिक नहीं है, इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट में राजस्व संहिता की धारा 6(2) को स्पष्ट करते हुए याचियों की ओर से बताया गया कि किसी जिले का नाम बदलने से पहले सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की जाती है। उस सूचना के बाद अगर कोई आपत्ति करता है तो उन आपत्तियों के निस्तारण के लिए सरकार एक कमेटी गठित करती है और आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही जिले का नाम बदला जा सकता है। इस मामले में सरकार ने कोई सार्वजनिक सूचना नहीं प्रकाशित की और ना ही आपत्तियों का निस्तारण किया गया। ऐसे में नाम बदलने की या पूरी प्रक्रिया ही असंवैधानिक है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

योगी सरकार ने क्या कहा

योगी सरकार ने क्या कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान योगी सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता मनीष गोयल ने राजस्व संहिता की धारा 6(2) पर बहस की और उन्होंने बताया इस धारा से जिले का क्षेत्रफल बदला जाता है। यहां, पर सरकार की ओर से जिला का नाम व मंडल का नाम बदला गया है। शहर का नाम अभी भी इलाहाबाद ही है और इस नाम को बदलने के लिए इलाहाबाद नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर नियमानुसार विचार हो रहा है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही शहर का नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने क्या कहा

याचिकाओं पर अधिवक्ताओं की बहस के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को जिले का नामकरण करने की शक्ति है। हालांकि उच्च न्यायालय ने सरकारी वकील से यह जानना चाहा था कि क्या जिला और शहर अलग-अलग हैं? हाईकोर्ट ने अभी जानना चाहा है कि कानून में सरकार को दोबारा नामकरण की शक्ति भी दी जाती है? फिलहाल सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इलाहाबाद के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद भी थम जाने की उम्मीद है।

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