कांग्रेस स्टार प्रचारकों ने फूलपुर और इलाहाबाद से खींचे पांव, उर्मिला मातोंडकर ने बताई ये वजह

प्रयागराज। कांग्रेस के गढ़ रहे इलाहाबाद व फूलपुर सीट पर कांग्रेस ने मतदान की जंग से पहले ही हथियार डाल दिए हैं। यूपी की राजनीति में कूदने के साथ ही इस सीट के लिए प्रियंका ने सबसे पहले हुंकार भरी थी, लेकिन समीकरणों को बनाने में विफल कांग्रेस के स्टार प्रचारकों ने भी अपने पांव यहां से पीछे खींच लिए हैं। कांग्रेसियों की सबसे बड़ी उम्मीद प्रियंका गांधी का रोड शो का कार्यक्रम भी कागजों पर तैयार होकर गठरी में दबा हुआ है। उर्मिला मातोंडकर की ओर से भयंकर लू की वजह बताकर रोड शो करने से इनकार कर दिया गया है।

संजय दत्‍त ने क्‍यों किया इनकार

संजय दत्‍त ने क्‍यों किया इनकार

प्रत्याशी बनने से इनकार कर चुके संजय दत्त ने इलाहाबाद व फूलपुर को कांग्रेस की सी कैटेगरी की लिस्ट में होने के कारण इलाहाबाद आने से मना कर दिया है, जबकि राहुल गांधी का कार्यक्रम ही तय नहीं हो सका है। दूसरे शब्दों में कहें तो इलाहाबाद में भाजपा और गठबंधन की ताकत के सामने कांग्रेस खुद को असहाय व लाचार देख रही है। बड़े नेताओं का कार्यक्रम कराने के बाद भी वोटों की संख्या में काफी पीछे रह रही कांग्रेस लड़ाई से पहले ही खुद को बाहर कर ले रही है और सही मायने में अब कांग्रेस यहां औपचारिक रूप से ही चुनाव लड़ती नजर आ रही है। हालांकि, योगेश शुक्ला के तौर पर कांग्रेस को इलाहाबाद से एक उम्दा प्रत्याशी मिला था और कांग्रेस ताबड़तोड़ बड़े नेताओं के सहारे यहां माहौल बना सकती थी, लेकिन भाजपा व गठबंधन की ताबड़तोड़ रैली, रोड शो और कार्यक्रम ने कांग्रेस को पनपने का मौका ही नहीं दिया और अब कांग्रेस ने इन सीटों पर अनिधिकृत तौर पर अपने पिछड़ने की स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल, अभी तक त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद चल रही थी, लेकिन कांग्रेस के स्टार प्रचारकों का इलाहाबाद, फूलपुर से किनारा यह साफ कर रहा है कि यहां अब लड़ाई गठबंधन और भाजपा के बीच ही होगी। कांग्रेस छोटे दलों की तरह वोट कटवा बनकर ही अपने प्रदर्शन से संतोष करेगी।

कार्यकर्ता करते रहे इंतजार

कार्यकर्ता करते रहे इंतजार

8 मई तक कांग्रेस के बड़े नेता कार्यकर्ताओं को दिलाशा देते रहे कि प्रियंका, राहुल, उर्मिला, संजय दत्त के कार्यक्रम होंगे और इससे कार्यकर्ता उत्साहित भी थे, लेकिन आज चुनाव प्रचार प्रसार का आखिरी दिन है और ना ही प्रिंयका आई और ना ही कांग्रेस के दूसरे स्टार प्रचारक। आश्चर्य की बात है कि संजय दत्त व उर्मिला का तो कार्यक्रम तय हो गया था। प्रशासन ने अनुमति भी मांग ली गई थी। उसके बावजूद भी कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। फिलहाल कांग्रेस की अब जमकर किरकिरी भी हो रही है। संभावना है कि एकाएक कोई बड़ा नेता आकर कांग्रेस में आकर कार्यक्रम करे। हालांकि, शुक्रवार को राज बब्बर और अजहरूद्दीन की जनसभा आयोजित की गई हैा

क्या कह रहे कांग्रेसी

क्या कह रहे कांग्रेसी

प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय ने कहा हमें तो कार्यक्रम मिला था, लेकिन क्यों नहीं हुआ, यह कमेटी का अपना फैसला है। किसी बड़े नेता के कार्यक्रम न होने से नाराज कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम कृष्ण पांडेय ने बताया कि इस बार आम चुनाव में कांग्रेस ने जिन सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं, उन्हे कैटेगरी में बांटा है। जहां शत प्रतिशत जीत की उम्मीद है वह सीट 'ए' कैटेगरी की लिस्ट में है और जहां संघर्ष है उसे 'बी' कैटेगरी में रखा गया है। जबकि जिन सीटों पर सिर्फ चुनाव खानपूर्ति के लिये लडा जा रहा है उसे 'सी' कैटेगरी की श्रेणी में रखा गया है और इलाहाबाद फूलपुर उसी श्रेणी में रखी गयी है। कांग्रेस का पूरा जोर इस बार ए व बी श्रेणी की सीटों पर है, इसलिये सी कैटेगरी की सीटों की बजाय सारा समय उपर ही लगाया जा रहा है ।

दौरा भी कुछ कहता है

दौरा भी कुछ कहता है

पिछले दिनों प्रियंका गांधी अचानक प्रयागराज पहुंची और आनंद भवन में काफी देर रही, लेकिन आश्चर्य की बात थी कि उन्होंने ना तो यहां के नेताओं से मिलने की जहमत उठाई और ना ही प्रत्याशी से। यही हाल सोनिया गांधी का भी रहा। वह भी आनंद भवन आईं, लेकिन ना प्रत्याशी से मिली ना ही यहां के नेताओं से। इशारों में पहले ही नेहरू गांधी परिवार ने यह साफ कर दिया था कि वह यहां के चुनाव को अब अहमियत नहीं दे रही हैं। हालांकि, इस सीट पर अगर कोई बड़ा चेहरा उतरा होता तो बात कुछ अलग होती, लेकिन अंदर की खबर भी यही है कि किसी भी बड़े चेहरे ने यहां लड़ने से इनकार कर दिया था। क्योंकि कांग्रेस की स्थिति इस सीट पर बेहद ही खराब है। बता दें कि फूलपुर से कांग्रेस खुद न लड़कर अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी पंकज को लड़ा रही है, जबकि इलाहाबाद से कमोवेश ऐसा ही हाल है। अचानक भाजपा छोड़कर आए योगेश शुक्ला को पार्टी ने टिकट दिया है, लेकिन दोनों ही नेताओं को अहमियत देने के बजाए उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

ये भी पढ़ें: प्रयागराज सीट पर क्या हैं जीत-हार के पुराने सियासी आंकड़े

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