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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में 15 हॉस्टल के 474 कमरे सील, छात्रों में सुलग रही चिंगारी

Prayagraj news, प्रयागराज। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्र नेता रोहित शुक्ला की हत्या के बाद हाईकोर्ट के सख्त रूख से शुरू हुआ कार्रवाई का दौर लगतार पांच दिनों से जारी है। बदमाशों का अड्डा बन चुके यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों को खाली कराने के लिए अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियान का असर भी दिखने लगा है। अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन व जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान में 15 हॉस्टल के 474 कमरे सील किए जा चुके हैं। इन कमरों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था और अवैध कब्जा करने वालों के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

कहां कितने कमरे हुए सील?

कहां कितने कमरे हुए सील?

हालांकि, कानून कार्रवाई के दूसरे पहलू से अब यूनविर्सिटी का माहौल और खराब हो रहा है। छात्र संघ के साथ छात्र संगठन इस कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं और हर रोज यह चिंगारी तेजी से सुलग रही हैं। प्रशासन को भी इस बात की आशंका है कि छात्रों का गुट किसी भी वक्त शहर में बड़ा बवाल कर सकता है, जिसे देखते हुए यूनिवर्सिटी का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और सुरक्षा को प्रमुखता से आरएएफ के हवाले कर दिया गया है। इसके अलावा, पुलिस व पीएसी के जवानों का अलग से घेरा बनाया गया है।हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद 22 अप्रैल को विश्वविद्वालय प्रशासन और जिला प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करना है और जवाब दाखिल करने के लिए ही प्रशासन ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहा है, जिसके क्रम में पीसी बनर्जी छात्रावास में 54 कमरे, सर सुंदर लाल में 43, डायमंड जुबिली में 46, केपीयूसी में 45, सर जीएन झा में 37, एस.राधाकृष्णन में 23, हिंदूू हॉस्टल में 35, अमरनाथ झा में एक, मुस्लिम बोर्डिग में 12, विलियम हालैंड हॉल में 25, पंत हॉस्टल में 79, एसडी जैन में 32 कमरो को सील किया गया है।

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ऑपरेशन क्लीन अनवांटेड आउट

ऑपरेशन क्लीन अनवांटेड आउट

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीसीबी हॉस्टल में रोहित शुक्ला की हत्या के बाद हाईकोर्ट की गहरी नाराजगी जाहिर होते ही हॉस्टलों पर बड़ी कार्रवाई करने की योजना मंगलवार देर रात में पुलिस के आलाधिकारियों ने बनाई और बिल्कुल सुबह जब छात्रावास नींद के आगोश में था तो ‘ऑपरेशन क्लीन अनवांटेड आउट' शुरू कर दिया। इसका क्रम लगातार पिछले पांच दिनों से चल रहा है और अब तक 15 छात्रावासों को खाली करा लिया गया है। जहां हास्टल में अवैध कब्जा व पढ़ाई से इतर चीजें बरामद हुई हैं।

हाईकोर्ट खुद करेगी मॉनिटरिंग

हाईकोर्ट खुद करेगी मॉनिटरिंग

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम हत्या, बमबाजी, अराजकता, गुडागर्दी जैसे मामलों में टॉप पर आने और पढ़ाई का ग्राफ शून्य को ओर जाता देख अब हाईकोर्ट भी पूरी तरह से सख्त हो गया है। हाईकोर्ट ने अपनी गहरी नाराजगी यूनिवर्सिटी प्रशासन व जिला पुलिस प्रशासन के प्रति व्यक्त करते हुए कहा कि कभी पूरी दुनिया में अपनी शैक्षिक गुणवत्ता के लिये यह संस्थान अग्रणी था, दुनिया इस पूरब का आक्सफोर्ड कहती थी, लेकिन आज विश्वविद्वालय का परिसर आपराधिक गतिविधियों का मैदान बन चुका है और विश्वविद्वालय प्रशासन मूक दर्शक बन कर सबकुछ देख रहा है। मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ अब इस मामले में स्वत: संज्ञान के तहत याचिका पर सुनवाई करेगी और संभावना कि वह ठोस कदम भी उठायेगी। हाईकोर्ट ने कानून व्यवस्था पर तंज कसते हुये कहाकि अब वह खुद इस बात पर संज्ञान ले रहे हैं कि इस सब में अधिकारियों की कितनी जिम्मेदारी है। शहर और आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था की अदालत खुद मॉनिटरिंग करेगी।

क्या है मामला

क्या है मामला

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता रोहित शुक्ला उर्फ बेटे की यूनिवर्सिटी के पीसीबी हास्टल गेट के पास दो दिन पहले गोली मारकर हत्या कर दी गयी। मामले में हत्या के तार दूसरे छात्र नेताओं से ही जुटे हुए हैं। पता चला है कि दोनो पक्ष अवैध रूप से ही हास्टल में रह रहे हैं और उनके कब्जे में हास्टल के कयी कमरे हैं। हालांकि हत्या में कोई शैक्षिक विवाद नहीं है, बल्कि बिजनेस का मामला है। लेकिन छात्र नेता के नाम पर ही गुंडई और ठेके का काम लिया जाता है। विश्विविद्वालय में पूर्व छात्र नेताओं के नाम पर काम हों और वर्चस्व रहे इसके लिये आये दिन बमबाजी और बवाल होते रहते हैं और यह कोई नयी बात नहीं, बल्कि छात्रसंघ चुनाव की बहाली के साथ ही ऐसा होता आया है। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच अभी चल रही है और हत्यारोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। वहीं रोहित की हत्या के बाद विश्वविद्वालय का माहौल पूरी तरह से खराब हो गया है और पूरे इलाके को कडी सुरक्षा व निगरानी में रखा गया है। इस दौरान एक बारात में हास्टल के छात्रों का भयंकर हुडदंग और बवाल भी इस कार्रवाई का प्रमुख कारण बना हुआ है।

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