कोरोना वॉरियर दंपती की मौत के बाद बेटियां लगा रही सरकार से गुहार, शहीद का दर्जा दिलाने की मांग
अजमेर, 2 जून। कहने को तो राजस्थान सरकार कोरोना वॉरियर्स की मृत्यु पर 50 लाख रुपए देने और अन्य सुविधाएं परिजन को देने के वादे कर रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

अजमेर संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में मरीजों की सेवा के दौरान संक्रमित होकर मौत के मुंह में जाने वाले नर्सिंग दंपति की बेटियां सरकार की ओर मुंह ताक रही है। सरकारी सुविधाओं के लिए वह दर-दर की ठोकरें खा रही हैं, लेकिन कोई भी उनकी सुध नहीं ले रहा।
अजमेर की मीर शाह अली कॉलोनी निवासी करतार और उसकी पत्नी जेएलएन अस्पताल में नर्सिंग प्रथम श्रेणी के रूप में कार्यरत थे। मृतक नर्सिंग दंपति की बेटी नीलिमा सिंह ने बताया कि 20 उसकी मां चंद्रावती और पिता करतार मरीजों की सेवा करते हुए कोरोना संक्रमित हो गई।
इसके बाद तबीयत बिगड़ी तो जेएलएन में भर्ती करवाया। जहां से 21 मार्च को मां को जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के लिए रैफर कर दिया इसके कुछ दिन बाद पिता को भी महात्मा गांधी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान 5 मई को मां ने और 5 दिन बाद 11 मई को पिता ने भी दम तोड़ दिया।
कोरोना संक्रमित होने के बाद भी उनकी मौत के दूसरे कारण बताकर सरकार मुआवजा देने से बच रही है। नीलिमा ने कहा कि उसके एक बहन है और कोई नहीं है। दादी भी उन्हीं पर आश्रित है लेकिन दोनों बहनें फिलहाल पढ़ाई ही कर रही है। अब मां बाप की मौत से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सरकार और ना ही कोई नुमाइंदा उनकी सुध ले रहा है। वह चाहती है कि माता पिता को शहीद का दर्जा मिले साथ ही सरकार तय की गई राशि भी प्रदान करें। उनकी मानें तो वह अब तक कई जगह चक्कर काट चुकी है लेकिन कोई उनकी सुनवाई नहीं कर रहा है।












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