ताकि मौत का मार्ग न बन जाये आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे

प्रदेश सरकार ने इस परियोजना की परिकल्पना जनता को त्वरित यातायात की सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से की है। सरकार प्रदेश की खुशहाली के लिए उच्चस्तरीय गुणवत्ता एवं सुविधाओं से युक्त सड़कों के निर्माण के पक्ष में है।
इस परियोजना का क्रियान्वयन उप्र एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा इपीसी मॉडल पर किया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है। किसानों से भूमि क्रय हेतु कुछ जनपदों में सहमति भी प्राप्त हो चुकी है तथा भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही तीव्र गति से की जा रही है।
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जिन इलाकों से गुजरेगा वहां मंडियों के विकास के अलावा किसानों की उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इसी के साथ जल्द खराब होने वाली सब्जियों एवं मौसमी फलों जैसे तरबूज एवं खरबूज आदि को भी शीघ्रता से नगरीय क्षेत्रों में पहुंचाने की सुविधा किसानों को मिल जाएगी।
प्रवक्ता के मुताबिक इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से फिरोजाबाद में ग्लास सिटी की स्थापना भी की जा सकती है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर दिल्ली से लखनऊ तक की दूरी और यात्रा समय में काफी कमी आ जाएगी। सड़क मार्ग से आगरा-लखनऊ की दूरी 350 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से यह दूरी घटकर लगभग 274 किलोमीटर रह जाएगी।
आगरा-लखनऊ तक की यात्रा मात्र 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। 6 लेन के प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे का विस्तार 8 लेन तक किया जा सकेगा।
बयान के मुताबिक एक्सप्रेस-वे के निर्माण में उपजाऊ भूमि का कम से कम अधिग्रहण किया जाएगा, क्योंकि इसका अधिकांश भाग नहर की पटरियों के करीब सिंचाई विभाग तथा अन्य सरकारी जमीनों में पड़ रहा है। बाढ़ से बचाने के लिए एक्सप्रेस-वे को भूमि सतह से काफी ऊंचा रखने तथा दोनों तरफ 10 मीटर से अधिक ग्रीन फील्ड पट्टी तैयार की जाएगी।
एक्सप्रेस-वे के साथ वाटर बॉडी तथा ईको फ्रेन्डली पार्क विकसित किए जाएंगे। यह एक्सप्रेस-वे फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज तथा मलिहाबाद के काफी करीब से गुजरेगा। इसलिए इन शहरों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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