Agra पुलिस का गजब कारनामा! दुबई में रह रहे युवक को शांति भंग का नोटिस, लिखा: 'कर सकता है अप्रिय घटना'
आगरा पुलिस ने दुबई में रह रहे युवक के खिलाफ बिना जांच किये शांति भंग का नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में ये लिखा था कि वह किसी भी समय अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है। यह नोटिस देख युवक के परिजनों के होश उड़ गए।

उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस का एक अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है, जिसमे सदर थाना पुलिस ने दुबई में रह रहे युवक को लोक परिशांति भंग करने का खतरा बताते हुए पाबंद करने की रिपोर्ट भेज दी। इस पर एसीपी छत्ता ने नोटिस जारी कर जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा। वहीं अब बिना जांच लोगों को पाबंद करने की रिपोर्ट भेजना अधिकारियों की फजीहत का कारण बन गया है। स्वजन को नोटिस मिलने पर वह मंगलवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे। पुलिस उपायुक्त विकास कुमार ने मामले की जांच आरंभ करा दी है।
भाई दुबई में, मुकदमा आगरा में
बता दें कि हिमाचल कालाेनी देवरी रोड निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ शैली जाट 2 अप्रैल 2023 से दुबई में हैं। वहां शैलेंद्र एक कंपनी में कार्यरत हैं। उनके भाई गजेंद्र सिंह वार्ड पांच से बसपा के पूर्व पार्षद हैं। गजेंद्र ने बताया कि उन्हें एसीपी छत्ता का नोटिस मिला। जिसमें भाई शैलेंद्र से लोक शांति को खतरा बताया गया। नोटिस में भाई शैलेंद्र सिंह को आपराधिक प्रवृत्ति का बताया गया। नोटिस में ये भी लिखा था कि वह किसी भी समय अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है। यह नोटिस देख गजेंद्र सिंह के होश उड़ गए।

बिना जांच के पाबंद करने के आदेश
शैलेन्द्र के भाई गजेंद्र ने बताया कि प्रभारी निरीक्षक सदर द्वारा उनके भाई को 110जी में पाबंद करने की आख्या दी थी। जिसके आधार पर एसीपी छत्ता की कोर्ट ने पाबंद करने के आदेश किए हैं। अब उन्हें दो जमानतदार पेश करने हैं। गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि भाई दुबई में रह रहा है। बिना जांच के ही भाई को पाबंद कर दिया गया। मामले में डीसीपी सिटी विकास कुमार को शिकायती पत्र दिया। जिसके बाद उन्होंने जांच के आदेश किए हैं।
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पहले भी शैलेंद्र को किया था नामजद
गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में थाना सदर में एक मुकदमा लिखा गया था। इसमें जानलेवा हमला और एससी-एसटी एक्ट लगा था। तब भी मुकदमे में रंजिशन शैलेंद्र को भी नामजद कर दिया गया। तीन अन्य आरोपी भी थे। उस समय भी भाई दूसरे प्रदेश में नौकरी कर रहा था। इसके साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए थे। वह निर्दोष था। साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे से शैलेंद्र का नाम निकाला गया। अब पुलिस ने इसी मुकदमे के आधार पर भाई के खिलाफ 110 जी की कार्रवाई की है, जबकि उसका नाम मुकदमे से निकल चुका है।

क्या है 110 जी ?
आपको बता दें कि 110 जी की कार्रवाई आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति के खिलाफ की जाती है। इसकी रिपोर्ट थाने से भेजी जाती है। पूर्व में दर्ज मुकदमों और कार्रवाई का हवाला दिया जाता है। पाबंद होने पर छह महीने तक थाने में हाजिरी देनी होती है। दो जमानतदार भी प्रस्तुत करने होते हैं। इस अवधि में नोटिस वाला व्यक्ति कोई घटना करता है तो जमानत राशि वसूल की जाती है। मगर, कई बार पुलिस बिना रजिस्टर देखे और पड़ताल किए कार्रवाई कर देती है। इस पर लोग शिकायत करते हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से कई सवाल खड़े होने के साथ-साथ फजीहत भी हो रही हैं।












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