दंगे की आग में जल उठा मुजफ्फनगर, 11 की हत्‍या के बाद बेकाबू शहर सेना के हवाले

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में भड़की हिंसा में एक पत्रकार सहित 11 लोगों की हत्‍या कर दी गई और कम से कम 34 लोग घायल हो गए। पुलिस हालात को नियंत्रण में करने में जुटी हुई है। पूरा मुजफ्फरनगर छावनी में तब्‍दील हो गया है और सेना के 1000 जवान की तैनाती की गई है। इस बीच सरकार ने हिंसा में मारे गए लोगों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी है।

हिंसा में मारे गए एक निजी समाचार चैनल के पत्रकार के परिजनों को 10 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिए जाने की घोषणा की है। इसके अलावा हिंसा में मारे गए अन्य लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। मृतकों के अलावा हिंसा में गम्भीर रूप से घायल हुए लोगों को 50 हजार रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों के लिए 20 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे।

Muzaffarnagar clashes: death toll rises to 11, Army called in.
इससे पहले सूबे के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार ने कहा कि हिंसा में अब तक छह लोगों की मौत हुई है और 34 लोग घायल हुए हैं। मगर उसके बाद मरने वालों की संख्‍या 11 पहुंच गई। अरुण कुमार ने माना कि जिले में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालात को काबू में करने के लिए पांच कम्पनी पीएसी और पांच कम्पनी आरएएफ तैनात की गयी है।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि वहां पहले सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए थे। महापंचायत को ध्यान में रखते हुए 9 पुलिस अधीक्षक, 14 पुलिस उपाधीक्षक और दो दर्जन इंस्पेक्टरों की तैनाती की गयी थी। इसके अलावा पीएसी और सीआरपीएफ की एक बटालियन को भी सुरक्षा में लगाया गया था। जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों हुए कवाल प्रकरण को लेकर नंगला मंदौड़ के इंटर कालेज में हो रही महापंचायत में हिस्सा लेने जा रही लोगों की भीड़ ने बस पर पथराव होने के बाद बेकाबू हो गयी और इसके बाद अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गयी।

बस पर पथराव में आधा दर्जन लोगों के घायल होने के बाद भीड़ अचानक ही बेकाबू हो गयी। महापंचायत में आ रहे लोगों की बस पर शाहपुर थाना क्षेत्र के बसी गांव के गैर संप्रदाय के युवकों ने पथराव कर दिया था, जिसमें आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। इधर, महापंचायत में सचिन-गौरव हत्यांकाड के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जेल गए हिंदू समाज के लोगों की रिहाई की मांग की गई और निर्णय लिया गया कि बहू-बेटियों के साथ बदसलूकी करने वालों से खुद ही सख्ती से निपटा जाएगा। छेड़छाड़ जैसे मामलों में पुलिस की मदद नहीं ली जाएगी।

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