निवेश और रोजगार का सृजन करें विकसित देश: मनमोहन सिंह
नई दिल्ली| भारत की सुस्त आर्थिक विकास दर और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रूपये को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि विकसित देशों को चाहिए कि वह निवेश और रोजगार को बढ़ावा दें और ऐसे कोई कदम न उठायें जिससे कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो। उन्होने यह बात जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए सेंट पीटर्सबर्ग रवाना होने से पहले कही है।
उन्होंने कहा, "हालांकि औद्योगिक देशों में विकास के उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं लेकिन वहां भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मंदी है, जो महत्वपूर्ण पूंजी प्रवाह के प्रतिकूल प्रभाव का सामना कर रहे हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं सेंट पीटर्सबर्ग में विकसित देशों द्वारा पिछले कुछ वर्षो में अपनाई गईं गैर परंपरागत मौद्रिक नीतियों से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने पर जोर दूंगा ताकि विकासशील दुनिया के विकास की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने से बचा जा सके।" क्योंकि इस समय वैश्विक माहौल अनिश्चित है।

उन्होंने कहा, "यह भी महत्वपूर्ण है कि जी-20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में नीति समन्वय को इस तरह प्रोत्साहित करे व बढ़ावा दे कि उससे व्यापक आधार वाला वैश्विक सतत आर्थिक सुधार व विकास प्राप्त हो सके।" प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारतीय मुद्रा रुपया डॉलर के मुकाबले 68 के निचले स्तर पर पहुंच गई है, आर्थिक विकास चार सालों के सबसे निचले स्तर पर है और शेयर बाजार भी प्रभावित है। मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत ने अपनी ओर से सुधारों को बढ़ावा देने, निवेश के अनुकूल माहौल बनाने, रुपये में स्थिरता लाने व वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूती देने की दिशा में कदम उठाए हैं और इस पर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "ऐसे में आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के लिए एक स्थिर व सहायक बाहरी आर्थिक वातावरण की भी आवश्यकता है।" सिंह ने कहा, "इसलिए जी-20 शिखर सम्मेलन सभी देशों के लिए लाभदायक एक अंतर्राष्ट्रीय माहौल हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।"












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