यूपी में टैक्स के बोझ तले दबे भगवान श्रीकृष्ण
लखनऊ। देश में जन्माष्टमी की धूम है। राधे-कृष्ण की गूंज से पूरा देश सरावोर हो गया है। भगवान कृष्ण की मूर्तियां भारी दामों पर बिक रही है। तरह-तरह के रंगों और आभूषणों से सजी भगवान की मूर्तियां की बाजार में धूम है। जन्माष्टमी के मौके पर जहां कृष्ण मूर्तियों की धू है तो वहीं छोटे से कान्हा अपने ही घर में 'कर' के बोझ से दबे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने कान्हा की मूर्तियों पर टैक्स लगा दिया है।
जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान और गुजरात ने भक्तों की भावना को देखते हुए कन्हैया की मूर्तियों को कर से मुक्त कर रखा है। ऐसे में ब्रज के कारोबारियों को बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

अखिलेश सरकार ने कान्हा की मूर्तियों पर 5 प्रतिशत वैट लगा है। हालांकि इससे पहले साल 2001 से 2009 तक इन मूर्तियों पर वैट का प्रतिशत शून्य था। लेकिन इस बार जन्माष्ठमी से ठीक पहले ने प्रदेश सरकार ने श्रीकृष्ण की मूर्तियों पर वैट लगाकर लोगों की परेशानियां बढ़ा दी है। जन्माष्टमी से पूर्व ही लड्डू गोपाल की मूर्तियों का कारोबार परवान चढ़ने लगता है। ब्रज के हाथरस, अलीगढ़, इगलास के आसपास के क्षेत्रों में तैयार बाल गोपाल की मूर्तियों की देश भर में मांग है।
महंगाई की मार झेर रही जनता पर यूपी सरकार ने एक और प्रहार कर दिया है। लोगों की भावनाओं पर सरकार की टैक्स व्यवस्था भारी पड़ रही है। टैक्स के कारण बढ़े दामों के कारण लोगों को इन मूर्तियों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं कारीगरों का भी बुरा हाल है। पूजा सामग्री के व्यापारी अजय गोयल ने बताया कि ब्रज में पूजा सामग्री का कारोबार व्यावसायिक के साथ ही भावनाओं से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को इस सामग्री को वैट मुक्त कर देना चाहिए। ताकि ब्रज में तैयार मूर्तियां देश-विदेशों में पहुंचकर लोगों की भावनाओं का केंद्र बन सकें।












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