सोनिया गांधी की यूपीए 3, एक सपना या हकीकत?
[अजय मोहन] सोनिया गांधी ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में विश्वास जताया है कि यूपीए सरकार अपनी तीसरी पारी भी खेलेगी, वो भी यूपीए 3 के रूप में। सोनिया ने कहा, "हमारा पहला लक्ष्य है यूपए 2 का कार्यकाल पूरा करना और दूसरा 2014 में परचम लहराना। हमें पूरा विश्वास है कि हम एक बार फिर सत्ता में आयेंगे।"
एक बार फिर सरकार बनाने के सोनिया के जज़्बे को हम सलाम करते हैं, लेकिन यूपीए 3 की उनकी परिकल्पना हकीकत बनेगा या फिर महज एक सपना बनकर रह जायेगा, यह बात सोचने वाली है। अगर गहराई से देखें तो सोनिया ने चुनाव में जीत के सपने का महल खाद्य सुरक्षा विधेयक के खंभों पर खड़ा किया है। सोनिया का दावा है कि देश में अब कोई भूखा नहीं सोयेगा। खाद्य सुरक्षा बिल हर गरीब का पेट भरेगा।

उनके अंदर जीत का विश्वास इसलिये उमड़ रहा है, क्योंकि सोनिया जानती हैं कि भारत में वोट का रास्ता गरीब के पेट से होते हुए जाता है। लेकिन वो यह भूल गई हैं कि देश में सिर्फ 29.8 फीसदी लोग ही गरीबी रेखा के नीचे हैं, जिनके लिये आप यह विधेयक लायी हैं। बाकी के 60.1 फसदी लोगों में मध्यम वर्गीय और अमीर लोग आते हैं। यानी आपका वोट तय करने में मीडियम और अपर क्लास की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
जिस तरह रुपए की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरती जा रही है, उसे यह साफ है कि आने वाले समय में तेजी से महंगाई बढ़ेगी। ऐसे में सबसे ज्यादा अगर कोई प्रभावित होगा तो वह मीडियम क्लास है। हालांकि रुपए की गिरावट का असर अपर क्लास पर भी दिखाई देगा, क्योंकि उनके लिये भी हर चीज महंगी होगी।
सोनिया गांधी अगर यह सोच रही हैं कि यूपीए 1 और 2 के कार्यक्राल में हुए भ्रष्टाचार को लोग भूल चुके हैं, तो हम आपको बता दें कि 2014 के चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाने के लिये एक अलग टीम तैयार हो रही है और वह है अन्ना हजारे की। मॉनसून सत्र के बाद केंद्र सरकार के पास दो और सत्र बचेंगे अगर उन दोनों में जन लोकपाल बिल पारित नहीं हुआ, तो निश्चित तौर पर अन्ना हजारे लाखों की जनता का समर्थन लेते हुए कांग्रेस के खिलाफ मुहिम छेड़ेंगे। अगर ऐसा हुआ, तो यूपीए 3 का सपना हकीकत बनने से चूक जायेगा, फिर चाहे भाजपा की सरकार आये या कोई तीसरा मोर्चा, सोनिया के हाथ से कमान छूट जायेगी।












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