84 कोसी परिक्रमा के चलते छावनी में तब्दील हुई अयोध्या
लखनऊ। अयोध्या में एक बार फिर 1992 जैसा माहौल दिखाई देने लगा है, चारों तरफ फ्लैग मार्च करते हुए सेना के जवान और पुलिस की चौकसी। ऐसा इसलिये है, क्योंकि एक तरफ विश्व हिन्दू परिषद आज से अयोध्या-फैजाबाद सहित छह जिलों से होकर गुजरने वाली 84 कोसी परिक्रमा यात्रा करने जा रही है, तो दूसरी तरफ उसे रोकने के लिये प्रदेश सरकार ने पूरा जाल बिछा दिया है।
सरकार की चाल को देखते हुए विहिप भी पल-पल रणनीति बदल रही है। इस बीच अयोध्या की ओर कूच कर रहे सैकड़ों की संख्या में संतों को आगरा, झांसी आदि जिलों में गिरफ्तार कर लिया गया है। भूमिगत हो चुके विहिप नेताओं व साधु-संतों की तलाश की जा रही है।सामान्य दिनों में आने वाले तीर्थ यात्री भी अब वहां जाने से परहेज कर रहे हैं। वहीं अयोध्या में पहले से मौजूद तीर्थ यात्री मौका पाकर समय से पूर्व ही अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान कर गए हैं।

अध्योया में सिर्फ बचे हैं स्थानीय निवासी
वर्तमान में अयोध्या में स्थानीय निवासियों के अलावा यदि कोई बाहरी है तो सिर्फ और सिर्फ पुलिस बल। अयोध्या-फैजाबाद जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं। वहीं उप्र की सीमा से जुड़ने वाले समीपवर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार तथा छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर चैकसी बढ़ा दी गई है। यात्रा को सफल बनाने के लिए विहिप गोपनीय रणनीति तैयार कर रही है। इसमें आरएसएस (संघ) भी उसका मार्ग दर्शन कर रहा है। उधर प्रशासन ने विहिप की योजना का पता लगाने के लिए अयोध्या के महत्वपूर्ण ठिकानों पर खुफियाकर्मियों का जाल बिछा दिया है। इसके अलावा 10 अस्थायी जेलें बना दी गई हैं।
श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने में प्रशासन का सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा है कि वह स्वयं इस यात्रा में शामिल होंगे। डीएम व एसएसपी ने अयोध्या में तैनात पुलिसकर्मियों को शान्ति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। होटलों, धर्मशालाओं, बस व रेलवे स्टेशनों पर नजर रखने की हिदायत दी गई है।
संत महात्मा पहुंचे इलाहाबाद
इस बीच 84 कोसी परिक्रमा में शामिल होने के लिए 25 अगस्त से पूर्व बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से प्रमुख संत-महात्मा इलाहाबाद पहुंच रहे हैं। ये लोग शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में विश्राम करेंगे। पुलिस-प्रशासन की सख्ती को धता बताकर अयोध्या के लिए अलग-अलग टोलियों में रवाना होंगे। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती
और अखिल भारतीय दण्डी प्रबंधन समिति के महामंत्री और पीठाधीश्वर स्वामी ब्रताश्रम महाराज चरखी दादरी ने आंदोलन का नेतृत्व करने वालों को आशीर्वाद दिया है। इन संत-महात्माओं का कहना है कि चातुर्मास की वजह से ये लोग अपने आश्रम से निकलकर नदी और नाला पार नहीं कर सकते हैं।
विहिप सूत्रों ने बताया कि अभी इलाहाबाद से अयोध्या जाने वाले संत-महात्माओं के नाम की घोषणा नहीं की जाएगी लेकिन इतना तय है कि देश के कोने-कोने से करीब 200 से अधिक प्रमुख संत-महात्मा इलाहाबाद से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। उधर, आगरा में सीमा में घुसते ही पुलिस ने 66 संतों को गिरफ्तार कर लिया है। संतों का यह काफिला अयोध्या की चौरासी कोस परिक्रमा को राजस्थान से चला था। गिरफ्तारी के बाद संतों को पुलिस अभिरक्षा में आगरा पुलिस लाइन लाया गया। अयोध्या में चौरासी कोस परिक्रमा में शामिल होने के लिए करीब 150 संत राजस्थान के जयपुर से निकले। आगरा से गुजरती हुई संतों की यह यात्रा अयोध्या पहुंचनी थी।
जगह-जगह संतों की गिरफ्तारी
प्रदेश के किसी भी शहर में अगर कोई संत अयोध्या की ओर कूच करता दिखाई दे रहा है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जा रहा है। प्रदेश की प्रवेश सीमा पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। संतों की टोली राजस्थान बार्डर से पार होकर चैमा शाहपुर गांव पहुंची। यहां 66 संतों को गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि एसडीएम किरावली राधा एस. चौहान के मुताबिक 45 संत ही गिरफ्तार किए गए हैं। चित्रकूट से अयोध्या जा रहे 17 संतों को सातमील के पास पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पिकअप से अयोध्या जा रहे 17 संतों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की जा रही है। सीओ निवेश कटियार ने बताया कि कानून व्यवस्था के साथ किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।












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