अमेरिका-रूस को टक्‍कर देगा स्‍वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत

कोच्चि। देश के लिये आज बड़े ही गौरव का दिन है, क्‍योंकि भारतीय नौसेना के लिये आज पहला देशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत समुद्र में उतरा है। आईएनएस विक्रांत को देश के रक्षामंत्री एके एंटनी ने अपनी पत्‍नी एलिजाबेथ के साथ कोच्चि में लॉन्‍च किया। विक्रांत का भारत 37,500 टन है, जो अमेरिका, यूके, रूस और फ्रांस के युद्धपोतों को टक्‍कर देगा।

इस जहाज की लंबाई 260 मीटर और चौड़ाई 60 मीटर है। इसे भारतीय नौसेना के बेड़े में 2018 तक शामिल कर लिया जायेगा। तब तक इस जहाज से तमाम परीक्षण किये जायेंगे। इस युद्धपोत पर से भारतीय वायुसेना के मिग 29, लाइट कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट व कमोव-31 हेलीकॉप्‍टर उड़ान भर सकते हैं। इस पोत को खास तौर से युद्धक सामग्री रखने के लिये तैयार किया गया है। इसमें तमाम उच्‍च तकनीक वाले हथियार भी लगे हैं। आईएनएस विक्रांत का निर्माण कोचिन शिपयार्ड में किया गया। इसे बनाने में चार साल लगे हैं।

विक्रांत का इतिहास

सबसे पहला आईएनएस विक्रांत उस युद्धपोत को दिया गया, जिसका विदेशी नाम एचएमएस हरक्‍यूलस आर49 था। इसे भारत ने 1957 में खरीदा। देश के पहले युद्धक जहाज आईएनएस विक्रांत ने 1971 में पाकिस्‍तान के खिलाफ युद्ध में अहम भूमिका निभयी थी। आज वह विक्रांत कफ परेड म्‍यूजियम, मुंबई में रखा हुआ है। खास बात यह है कि वो पहला आईएनएस विक्रांत एक मात्र युद्ध पोत है, जो द्वितीय विश्‍वयुद्ध में इस्‍तेमाल किया गया था।

इसके बाद आईएनएस विराट, आईएनएस विक्रमादित्‍य और आईएनएस जलाश्‍वा भारतीय नौसेना में शामिल हुए।

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