हां ये सच है, मैं उमा भारती से बेइंतहा मोहब्बत करता था: गोविंदाचार्य
लखनऊ। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की फायर ब्रांड नेता और बेबाक बयानबाजी से राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली उमा भारती तो दूसरी तरफ संघ परिवार व भाजपा की रीति-नीति व राजनीति के लंबे समय तक शिल्पकार रहे कोणिपक्कम नीलमेघाचार्य गोविंदाचार्च उर्फ केएन गोविंदाचार्य। आप कभी सोच भी नहीं सकते कि इन दोनों नामों के बीच प्यार शब्द भी आ सकता है क्योंकि दोनों ब्रह्मचारी है। मगर ये सच है कि गोविंदाचार्य ने उमा भारती की तस्वीर अपने दिल में बैठा रखी थी मगर संघ के उसूल और नियम कानूनों ने उनके प्यार को सफल नहीं होने दिया और गोविंदाचार्य ने अपने ही हाथों अपने प्यार के एहसास को सूली पर टांग दिया। वहीं उमा भारती अब साध्वी बन चुकी हैं।
कोणिपक्कम नीलमेघाचार्य गोविंदाचार्च उर्फ केएन गोविंदाचार्य ने स्वीकार किया कि उनके दिल में भी प्रेम की लहर कुछ वैसी ही उठी थी जैसी सामान्य मनुष्य के अंदर उठती है। उन्होंने बताया कि बाद में इस प्रेम प्रसंग ने जब संघ व भाजपा के रंग में भंग डाल दिया और बखेड़ा खड़ा हो गया तो संगठन ने अनुशासन और संघ के संस्कार को प्राथमिकता देते हुए मैंने अपने ही हाथों अपने प्रेम को सूली पर टांग दिया। गोविंदाचार्य ने इसे भी स्वीकार किया कि इसके पीछे उमा भारती की इंकार भी एक खास वजह थी।

उमा जी ने 1992 में संन्यास का फैसला ले लिया। मुझे अध्यात्म से प्रेम की प्रेरणा दी। मैने भी अपनी भूमिका बदल ली। संन्यास के साथ उमा मेरे लिए गुरु हो गई। गोविंदाचार्य ने भले ही अपने दिल में उमा भारती के लिए प्रेम-भाव पनपने की बात स्वीकार कर ली हो। मगर, उमा आज तक इस तथ्य को स्वीकार करने से कतराती रही हैं। यहां तक कि जब कभी सवाल भी हुआ, तो उन्होंने इसे बकवास तक करार दे दिया। भले ही उमा भारती ने गोविंदाचार्य के प्रेम को स्वीकार न किया हो, लेकिन गोविंद जी के दिल में उमा को लेकर सम्मान जरा भी कम नहीं हुआ। उनके अनुसार वह बेहतरीन राजनेता हैं। उनकी स्मरणशक्ति और वक्तृत्व शैली बेमिसाल है। उनके भीतर भी गैर बराबरी व गरीबी के खिलाफ संघर्ष की तड़प है।












Click it and Unblock the Notifications