अनोखी मिसाल: हिन्‍दू ने मुसलमान को दी किडनी

बेंगलुरु। रमज़ान के मुबारक मौके पर हिन्‍दुओं द्वारा इफ्तार पार्टी में शिरकत करने की खबरें तो आप हर रोज सुन रहे होंगे, लेकिन इससे बेहतरीन मिसाल शायद ही कोई होगी कि एक मुसलमान महिला ने हिन्‍दू पुरुष को अपनी एक किडनी देकर उनकी जान बचायी। यही नहीं एकता और भाईचारे की यह मिसाल और भी दिलचस्‍प हो गई, जब उनके पति को उसी मरीज की पत्‍नी ने अपनी किडनी दान कर दी।

ऑर्गन डोनर दिवस पर इससे अच्‍छी मिसाल शायद ही हो सकती है। यह खबर बैंगलोर के नारायण हृदयालय अस्‍पताल से आयी। यहां पर एडमिट 53 वर्षीय विश्‍वनाथ भट्ट पिछले दो साल से डायलिसिस पर थे। जिंदगी और मौत से जूझते विश्‍वनाथ की पत्‍नी ने जब अपनी किडनी देने का निर्णय लिया, तो पता चला कि उनकी किडनी मैच नहीं कर रही है। वो निराश हुईं और ब्‍लड ग्रुप मैच नहीं होने की वजह से अपने पति के लिये औरों से जिंदगी की दुआएं मांगने को कहने लगीं।

उधर उसी अस्‍पताल में भर्ती अब्‍दुल खलील की उम्र 60 साल है, वह 18 महीनों से डायलिसिस पर थे उनकी किडनी भी फेल हो चुकी थी। दुर्भाग्‍यवश उनकी पत्‍नी आबिदा खलील का ब्‍लड ग्रुप भी मैच नहीं किया। नारायण अस्‍पताल में जब ऊषा और आबिदा की मुलाकात हुई तो दोनों का दर्द एक जैसा था, दोनों नम आंखें लिये हुईं अपना दर्द बांट ही रही थीं कि अचानक उनके मन में खयाल आया कि क्‍यों न अस्‍पताल से किडनी स्‍वापिंग की बात की जाये।

Usha, Khadeel

नारायण अस्‍पताल के डॉक्‍टरों को दोनों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट दिखायीं और सौभाग्‍य से आबिदा का ब्‍लड ग्रुप विश्‍वनाथ से और ऊषा का ब्‍लडग्रुप अब्‍दुल खलील से मैच कर गया। नारायण हृदयायल में एक अगस्‍त को दोनों की किडनी ट्रांसप्‍लांट हुई।

आबिदा और ऊषा की इस पहल के लिये अस्‍पताल के पूरे स्‍टाफ ने उन्‍हें बधाई दी और सलाम किया। आखिर क्‍यों न सलाम करें, ऐसे लोग ही देश की गंगा-जमुनी संस्‍कृति को बरकरार रखने के प्रयास में हमेशा रहते हैं।

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