राहुल गांधी की अजीब थ्योरी: गरीबी सिर्फ मानसिक स्थिति, और कुछ नहीं
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। कांग्रेस के युवराज और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी जब भी कुछ बोलते हैं उसमें परिपक्वता की कमी नजर आ ही जाती है। इस बार राहुल गांधी ने गरीबी पर एक अजीबो-गरीबो बयान दिया है जिसे लेकर विवाद शुरु हो गया है। गरीबी पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इसपर सिर्फ आत्मविश्वास के बूते काबू पाया जा सकता है। गरीबी की नई परिभाषा गढ़ते हुए राहुल गांधी ने कहा कि 'गरीबी एक मानसिक अवस्था है। खाना, पैसे और भौतिक चीजों की कमी से इसका कोई लेना-देना नहीं है। अगर आप में आत्मविश्वास है तो आप गरीबी से उबर सकते हैं।'
एक सेमिनार में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि गरीबी का भोजन, रुपये और भौतिक वस्तुओं की कमी से कोई लेना-देना नहीं है। उनका मानना है कि खैरात बांटने से गरीबी दूर होने वाली नहीं है। जब तक लोग खुद में आत्मविश्वास नहीं लाएंगे गरीबी के चक्रव्यूह को तोड़ना असंभव है।

इलाहाबाद के झूंसी स्थित गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक शोध संस्थान के दलित रिसोर्स सेंटर द्वारा आयोजित सेमिनार में राहुल गांधी ने कहा कि 'सरकार गरीबों के लिए चाहे जितनी कल्याणकारी योजनाएं बनाए, गरीब गरीबी की बेड़ियों से तब तक आजाद नहीं होगा, जब तक वह खुद के अंदर आत्मविश्वास और आत्मशक्ति नहीं पैदा कर लेता।
खैरात बांटने से गरीबी दूर नहीं होने वाली। नि:स्संदेह जनजातीय समुदाय के सामने कई तरह की समस्याएं हैं पर उनका हल भी उनके ही अंदर से आएगा। जातिगत वोट की राजनीति खेलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैं आपकी मुश्किलें जानना चाहता हूं। आपके घर आना चाहता हूं। आपसे एक दो दिन का नहीं, स्थाई रिश्ता बनाना चाहता हूं। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में इलाहाबाद, वाराणसी, चित्रकूट, जौनपर, सुल्तानपुर व चंदौली जिलों से आए दलित लोग मौजूद थे। राहुल ने इनकी समस्याएं सुनी और इन्हें दूर करने का भरोसा भी दिया।












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