सेनेटरी पैड्स और डायपर्स बने लोगों के लिए सिरदर्द
पुणे। हर समझदार महिला और लड़की अपने लिए सेनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती है क्योंकि जहां यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा और बेहतर होता है, वहीं उसकी मुश्किल दिनों में उसे कई समस्याओं से निजात भी दिलाता है। लेकिन महिलाओं की बेहद निजी स्वच्छता में इस्तेमाल होने वाले सेनेटरी पैड्स बीते कुछ महीनों से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक व शैक्षिक राजधानी पुणे में एक खुले विवाद की वजह बन गए हैं।
शहर की महिला आबादी प्रतिमाह तकरीबन एक लाख सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करती है, जिनका वजन करीब 140 टन होता है। इतनी बड़ी मात्रा में इन सेनेटरी पैड्स का स्वास्थ्य व पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाए बिना निपटान एक बहुत बड़ी चुनौती है। अब पुणे के सफाईकर्मियों ने सेनेटरी पैड्स और यहां तक कि बच्चों या बड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाले डायपर्स को कचरे के साथ इकट्ठा करने व उनके निपटान को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि पुणे नगरनिगम (पीएमसी) ने सेनेटरी पैड्स निर्माताओं से सेनेटरी पैड्स से पर्यावरण व स्वास्थ्य को पहुंचने वाले नुकसान से बचने के लिए इस तरह के प्रत्येक पैड के साथ एक विशेष निपटान बैग देने की मांग की है।
आईये आपको बताते हैं कि सेनेटरी पैड्स किस तरह लोगों के लिए सिरदर्द बना है...

(एसडब्ल्यूएसीएच) ने की पहल
संयुक्त नगरनिगम आयुक्त सुरेश जगताप ने कहा कि जनवरी में मेयर वैशाली बानकर और नगरनिगम आयुक्त महेश पाठक ने इस समस्या का समाधान खोजने के लिए एक बैठक में कुछ कम्पनियों को आमंत्रित किया था। लेकिन किसी भी कम्पनी का प्रतिनिधि बैठक में नहीं पहुंचा। अब एक गैर सरकारी संगठन सॉलिड वेस्ट कलेक्शन एंड मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएसीएच) ने इस दिशा में सीधे पहल करने का निर्णय लिया है।

सेनेटरी पैड्स का निपटान किस तरह किया जाए
एसडब्ल्यूएसीएच से सम्बद्ध मालती गाडगिल ने बताया कि अप्रैल में जॉनसन एंड जॉनसन, प्रॉक्टर एंड गैम्बल, हिंदुस्तान यूनिलीवर व किम्बर्ले क्लार्क लीवर और अन्य कम्पनियों ने पीएमसी अधिकारियों से मुलाकात की और तीन महीने के अंदर इसका समाधान पेश करने का आश्वासन दिया।
जिसमें इन बातों का समाधान होगा कि इस्तेमाल किए गए सेनेटरी पैड्स का निपटान किस तरह किया जाए, उन्हें सूखे अपशिष्ट पदार्थो में रखा जाए या गीले अपशिष्ट पदार्थो में, ये पैड्स स्वाभाविक तरीके से सड़ कर नष्ट होने वाले हैं अथवा नहीं और वे पुन: चक्रण योग्य हैं अथवा नहीं।

सेनेटरी पैड्स व डायपर्स को लेकर शिकायत
एसडब्ल्यूएसीएच सदस्यों की ओर से सबसे बड़ी शिकायत सेनेटरी पैड्स व डायपर्स को लेकर थी, जिन्हें उठाना वे अपमानजनक और साथ ही साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते थे।"
मालूम हो कि प्लास्टिक मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स, 2011 के तहत एक्स्टेन्डेड प्रोड्यूसर्स रेस्पांसबिलिटी के मुताबिक निर्माताओं की यह जिम्मेदारी होती है कि वे अपने उत्पादों के इस्तेमाल के पश्चात उनके निपटान तक की जिम्मेदारी सुनिश्चित करें। गाडगिल ने कहा कि गैर-जागरूक लोग उन्हें या तो कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं या टॉयलेट में बहा देते हैं

सेनेटरी पैड्स व डायपर्स का निपटान कैसे हो?
यह मुद्दा सफाईकर्मियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसलिए गाडगिल ने मांग की है कि सेनेटरी पैड्स व डायपर्स निर्माता कम्पनियां इस समस्या का त्वरित व उपयुक्त समाधान पेश करें।

सेनेटरी पैड्स व डायपर्स को उठाना अपमानजनक
अमेरिका से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर गाडगिल ने कहा, एसडब्ल्यूएसीएच के कचरा उठाने वाले 2,300 सदस्यों ने घर-घर जाकर पुणे के 400,000 घरों या कि शहर के लगभग 53 प्रतिशत घरों से कचरा इकट्ठा किया।
गाडगिल ने बताया, "एसडब्ल्यूएसीएच सदस्यों की ओर से सबसे बड़ी शिकायत सेनेटरी पैड्स व डायपर्स को लेकर थी, जिन्हें उठाना वे अपमानजनक और साथ ही साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते थे।"












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