रमजान : समर्पण और दया का महीना
रमजान अच्छे कार्यो, व्रत, समर्पण, दया, ईमानदारी, क्षमा और प्रायश्चित का महीना है। विश्व के चौथे सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश भारत के 14 करोड़ मुसलमान समर्पण और पूरे उत्साह के साथ रमजान का महीना मना रहे हैं।
इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने रमजान की शुरुआत गुरुवार को हुई। मुस्लिम समाज के लोग इस्लाम के पांच नियमों में से एक रोजा का पालन एक महीने तक करते हैं।
यह व्रत बीमार और यात्रियों के सिवाय सभी के लिए आवश्यक है। इस दौरान हर दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक मुसलमान भोजन, पानी और यौन संबंधों से खुद को दूर रखते हैं।
मुसलमान पांच वक्त की नमाज, रात के वक्त की अतिरिक्त नमाज जैसे 'तारावीह' व 'तहाजुद' और कुरान के जरिए परमेश्वर के करीब पहुंचने की कोशिश करते हैं।
जमात-ए-इस्लामी की नामपल्ली (हैदराबाद) इकाई के प्रमुख सुल्तान मोहिउद्दीन ने आईएएनएस को बताया, "व्रत कर हम अल्लाह को कुरान की सौगात देन के लिए धन्यवाद देते हैं जो इस पवित्र महीने में लिखी गई थी। यह न सिर्फ मुस्लिम बल्कि पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक है।"
उन्होंने कहा, "व्रत इंसान को आत्म नियंत्रण की सीख देता है। आम दिनों में सुलभ चीजों से दूर रहकर हम अन्य दिनों में खुद पर नियंत्रण रखते हैं।"
व्रत के दौरान इंसान के धैर्य की परीक्षा होती है। जब इंसान भोजन नहीं करता, तो उसमें गुस्सा पैदा होता है और वह लड़ने के लिए तैयार रहता है लेकिन रोजा आत्मनियंत्रण सिखाता है। गुस्से और प्यास पर नियंत्रण रख उसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि उसे न तो अभद्र बातें करनी हैं और न ही किसी से लड़ना और उसे नुकसान पहुंचाना है।
एक जानकार व्यक्ति ने कहा, "जब एक इंसान व्रत रखता है तब उसे इस बात का अहसास होता है कि कई ऐसे लोग हैं जिसे दो वक्त का भोजन नहीं मिल पाता और वह आवश्यक चीजों से वंचित रह जाता है।"
दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता या मुंबई जैसे शहर में मुसलमान विशेषकर शाम के वक्त बाहर निकलते हैं। व्रत खोलने के समय होने वाले दावत (इफ्तार) के लिए बाजार में खजूर, फल और भुने हुए खाद्य पदार्थो को खरीदने वाले ग्राहकों की भीड़ लग जाती है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य शीर्ष नेता भी इफ्तार दावत का आयोजन करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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