युवा भी हो रहे हृदयाघात के शिकार

नई दिल्ली। हृदयाघात का खतरा अब सिर्फ उम्रदराज लोगों के लिए चिंता का विषय नहीं रहा, बल्कि इसने पेशेवर युवाओं को भी अपने फंदे में जकड़ना शुरू किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे काम के घंटे, शारीरिक व्यायाम की कमी और खान-पान की गलत आदतों का 20 से 30 साल के बीच की उम्र वाले युवाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

इंडस हेल्थ प्लस प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक कंचन नैकवाडी ने कहा कि इंडिया टुडे द्वारा 46,000 शहरी भारतीयों पर किए गए सफोला लाइफ अध्ययन में 30 से 34 साल के बीच की आयु-वर्ग के 78 प्रतिशत लोगों में हृदयाघात का खतरा पाया गया।

Youth

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति मिनट हृदयाघात से चार मौतें होती हैं, मृतक प्राय: 30 से 50 की आयु वर्ग के होते हैं।

नैकवाडी ने आईएएनएस को बताया, "आईटी और बीपीओ जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले युवाओं में हृदयाघात का खतरा ज्यादा रहता है। इन जगहों पर एक ही जगह पर बैठकर लंबे समय तक काम करने और शारीरिक व्यायाम न के बराबर होने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।"

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल हृदयरोग विशेषज्ञ और विभागाध्यक्ष अमर सिंघल के अनुसार, युवाओं में धूम्रपान दिल के दौरों का सबसे बड़ा कारण है। शारीरिक व्यायाम न करना और शराब का सेवन इस खतरे को और बढ़ा देता है। कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा स्तर, मधुमेह और अत्यधिक तनाव दूसरे कारण हैं।"

जस्ट फॉर हार्ट के सह संस्थापक और हृदय रोग विशेषज्ञ रवींद्र एल. कुलकर्णी ने कहा कि पहले हृदयाघात को उम्रदराज पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लकिन अब महिलाओं में भी हृदयाघात आम हो गया है।

सिंघल ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने के बाद खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए। और समय-समय पर डॉक्टरी जांच कराते रहना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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