मुलायम पर बेनी की बकबक के आगे कांग्रेस लाचार
[नवीन निगम]। बेनी प्रसाद के बयान से खफा कांग्रेस ने उन्हें नसीहत क्या दी, बेनी को मौका मिल गया अपनी शतरंज में मोहरे को आगे बढ़ाने का। जब कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं है और उन्हें इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। बेनी को लगा कि यही सही मौका हैं चौका मारने का। उन्होंने तत्काल बयान जारी कर दिया कि यदि उन्हें मुलायम के खिलाफ बोलने से रोका गया तो वह पार्टी छोड़ देंगे।
कांग्रेस या तो जानबूझकर अंजान बन रही है या वाकई अंजान है कि वह यह समझ नहीं पा रही है कि बेनी बाबू की असली मंशा क्या हैं। आज कोई कांग्रेसी ऐसा है जो मंत्री पद पर रहते हुए यह कहे कि पार्टी ने मुझे ऐसा करने से रोका तो मैं पार्टी छोड़ दूंगा। क्या बेनी बाबू इस बात का मतलब नहीं जानते कि कांग्रेस में इस तरह के बयान घोर अनुशासनहीनता माने जाते हैं, लेकिन कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह हाल ही में पार्टी में आए इस कुर्मी नेता को खोने को बिलकुल भी तैयार नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस यही गलती कर रही हैं।

जब उसे पता चल चुका है कि बेनी प्रसाद वर्मा मायावती के खिलाफ साफ्ट कार्नर रखते हैं तो वह क्यों नहीं बेनी प्रसाद से साफ-साफ पूछ लेती है कि उनकी बसपा में जाने की अटकलों में कितना दम हैं और यदि वह इसे खारिज करते हैं तो वह मायावती के खिलाफ वैसे आरोप क्यों नहीं लगाते हैं जैसे आरोप मुलायम पर लगाते रहते हैं, लेकिन कांग्रेस की परेशानी यहीं है कि वह किसी प्रकार बेनी प्रसाद वर्मा को कांग्रेस में बनाए रखना चाहती है और यही पर कांग्रेस बहुत बड़ी सियासी बेवकूफी कर रही हैं। कांग्रेस उन्हें जितना पुचकारेगी उनके कांग्रेस छोडऩे की संभावना उतनी बढ़ जाएंगी। क्योंकि जहां वह जाना चाह रहे हैं वहां उनकी कीमत बढ़ती चली जाएंगी और इस तरह वह कांग्रेस में मंत्री पद पर रहते समय भी काट लेंगे और मौके पर कांग्रेस को छोड़कर उसका बड़ा नुकसान कर देंगे।












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