सीएम साहब देखिये, क्या-क्या हो रहा है मुफ्त लैपटॉप पाने के लिए

लखनऊ (ब्यूरो)। इंटरमीडिएट पास विद्यार्थियों को बांटे जा रहे मुफ्त लैपटॉप के बहाने फर्जी माक्र्सशीट बनाने वाले भी अपनी किस्मत चमकाने में लगे हैं। जालसाज छात्रों को झांसा दे रहे हैं कि सरकार एचपी कंपनी का जो लैपटॉप मुफ्त दे रही है वह बाजार में 34 हजार रुपये का है। इसके आधे खर्च में बनवाई गई इंटरमीडिएट की माक्र्सशीट से लैपटॉप भी मिल जाएगा और स्नातक में दाखिला भी। शिया कॉलेज में ऐसा ही एक छात्र पकड़ा गया जिसने लैपटॉप की लालच में दो बार फर्जी माक्र्सशीट बनवा डाली। वह मुख्यमंत्री से लैपटॉप पाने में कामयाब भी हो जाता लेकिन मौके पर माक्र्सशीट खोने की बात ने उसके मंसूबे पर पानी फेर दिया। उसने दोनों माक्र्सशीट बाराबंकी के एक प्रिंसिपल से बनवाई थी। हालांकि, लिखित बयान देने के बाद वह बहाना बनाकर भाग निकला। प्राचार्य ने उसके खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।

शिया पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमएस नकवी ने बताया कि छात्र वीरपाल ने बीते साल एलआरके इंटर कॉलेज फैजाबाद की माक्र्सशीट लगाकर बीए में दाखिला लिया था। इस माक्र्सशीट का माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन सत्यापन भी किया गया था। इसके बाद छात्र ने लैपटॉप पाने के लिए आवेदन किया। उसका नाम उस सूची में था, जिन्हें बीते 11 मार्च को कॉल्विन कॉलेज ग्राउंड पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यक्रम में लैपटॉप मिलना था।

Students going wrong ways to get free laptops

कॉल्विन ग्राउंड पहुंच उसने अफसरों को इंटरमीडिएट की माक्र्सशीट गुम होने की बात कहते हुए एफआईआर की कॉपी दिखाई। मगर अफसरों ने उसे यूपी बोर्ड से डुप्लीकेट माक्र्सशीट लाकर कॉलेज से लैपटॉप लेने की बात कह लौटा दिया। वीरपाल ने कॉलेज में भी वही बहाना बनाया। प्राचार्य ने भी उससे डुप्लीकेट माक्र्सशीट लाने को कहा। इस बार वीरपाल जो माक्र्सशीट लाया वह सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटर कॉलेज शाहजहांपुर की थी और यही वो पकड़ा गया।

वीरपाल ने पूछताछ में बताया कि उसका बड़ा भाई इंद्रपाल वर्मा बिसवां तहसील में चपरासी है। उसने ही बाराबंकी के एक प्रिंसिपल को 14 हजार रुपये देकर माक्र्सशीट बनवाई थी। पहला अंकपत्र खोने के बाद दूसरा बनवाया। वीरपाल प्रिंसिपल का नाम तो नहीं बता सका अलबत्ता उसके फोन नंबर 9415053327 की जरूर जानकारी दी। इस नंबर पर पूछताछ करने पर फोन उठाने वाले शख्स ने कहा, मैं इलाहाबाद में रहता हूं। वीरपाल के बारे में पूछने पर वह खामोश हो गया। इसके बाद उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। वीरपाल ने बताया कि इंटर फेल कई छात्रों ने इसी शख्स से मार्कशीट बनवाई थी। इसने सबको सलाह दिया कि लखनऊ में पहले लैपटॉप बंटेंगे, लिहाजा वहीं किसी कॉलेज में दाखिला ले लो।

सवाल यह उठता है कि जिसने फर्जी माक्र्सशीट बनाई उसने केवल वीरपाल की फर्जी माक्र्सशीट तो बनाई नहीं होगी। उसने न जाने कितने छात्रों से पैसे लेकर माक्र्सशीट बनाई होगी। जब वीरपाल ने यह बताया है कि माक्र्सशीट बनाने वाले ने कहा कि लखनऊ में एडमिशन लो, तो यह साफ हो जाता है कि वो जानता था कि मुख्यमंत्री और अफसर क्योंकि लखनऊ में रहते है इसलिए लखनऊ में लैपटाप पहले और ज्यादा संख्या में बटेंगे। फर्जी मार्क्‍सशीट बनाने वाले के पास लगता है लैपटॉप के चक्कर में काम ज्यादा आ गया था तभी वह वीरपाल का हिसाब नहीं रख पाया कि उसने पहले उसे किस कॉलेज की माक्र्सशीट वीरपाल को दी थी, यदि वीरपाल को उसने वहीं मार्क्‍सशीट दे दी होती तो वीरपाल लैपटाप भी पा चुका होता और दाखिला भी।

अब सोचने की बात है कि ऐसे कितने ही वीरपाल और कितने ही कॉलेजों में दाखिले के साथ ही साथ लैपटॉप ले चुके है और वह अब इन्हें बेचने का जुगाड भी कर रही रहे होंगे क्योंकि उन्होंने लैपटाप नामक इस धंधे में रकम लगाई ही यह सोचकर है कि इस बेचकर मुनाफा कमाएंगे। ऐसे में लैपटाप मुफ्त बांटने की स्कीम पर क्या मुख्यमंत्री जी को फिर नहीं सोचना चाहिए।

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