सोनिया को भाये आजाद, कट सकता है अब्दुल्ला का पत्ता
श्रीनगर। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2005-2008 के कार्यकाल की प्रशंसा की है। क्या इसका कोई खास मकसद है? राज्य के दौरे के दौरान उनके बयान ने कई लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2014 के आखिर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में यदि पार्टी की जीत होती है तो उस स्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष आजाद को मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगी। आजाद के राजनीतिक किले किश्तवाड़ जिले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा चेनाब नदी पर 850 मेगावाट के पनबिजली परियोजना की आधारशिला रखने के बाद आमसभा को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा था कि राज्य में आजाद के मुख्यमंत्रित्व काल में शासन बेहतर रहा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आजाद के विकास के प्रति प्रतिबद्धता के कारण उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य में आठ जिले सृजित किए गए। तीन जिले डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ राज्य के जम्मू संभाग जिसे चिनाब घाटी के नाम से जाना जाता है, में सृजित हुए। यह इलाका आजाद का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। आजाद भद्रवाह जिले के रहने वाले हैं।
कांग्रेस की निगाह इन तीनों जिलों पर है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 87 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी की मौजूदा ताकत 17 से बढ़ सकती है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जम्मू क्षेत्र से 2008 के चुनाव में 11 सीटें हासिल हुईं। राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका था जब भाजपा को इतनी सीटें मिलीं। इसके पीछे राज्य में अमरनाथ भूमि को लेकर उठा विवाद रहा। हम निश्चित रूप से इन 11 विधानसभा सीटों में अच्छी संख्या झटकने में कामयाब हो सकेंगे।" कांग्रेस नेता ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा का स्टार प्रचारक बनाए जाने से हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र में उनका प्रभाव बढ़ने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।












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