'नमो-नमो' के नाम पर नीतीश ने किया 'राम-राम', कहा अटल-आडवाणी युग का हुआ अंत
पटना। समय से पहले आए मानसून ने बाहर के मौसम को सुहाना कर दिया है। मौसम की इस करवट के बीच राजनीतिक सियासी उठापटक और गहमा-गहमी इस मौसम में गर्माहट ला रही है। नरेन्द्र मोदी के नाम पर उठा तूफान अब तक नहीं शांत नहीं हुआ है। बीजेपी और जेडीयू की 17 साल पुरानी दोस्ती अब टूट चुकी है। कल तक जो नीतीश बीजेपी का गुणगान कर रहे थे आज वो बीजेपी की खामियां गिनवा रहे है। नीतीश ने गठबंधन में टूटने की वजह का ढ़ीकरा बीजेपी के माथे मढ़ दिया।
अपना पल्ला झाड़ते हुए नीतीश ने तो साफ कह दिया कि हम बातचीत से इस मसले को खत्म करना ताहते थे, लेकिन बीजेपी नेताओं की ऐढ़ ने गटबंधन को ही तोड़ दिया। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन खत्म होने के पीछे बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रहे नीतीश ने कहा कि बीजेपी नेता अगर मिल जाते तो रास्ता निकल आता और गठबंधन टूटने की नौबत नहीं आती।

एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश पर विश्वसघात का आरोप लगता रहा, लेकिन नीतीश कुमार ने जदयू पर लगे विश्वासघात संबंधी भाजपा के आरोपों का खंडन किया। नीतीश ने कहा कि बिहार की राजनीति तबतक सही चलती रही जबतक बाहरी लोगों ने उसमें दखलअंदाजी नहीं की, लेकिन अब बाहरी लोगों के दखल से परेशानी होकर जेडीयू ने इस गठबंधन से अलग होने का फैसला किया।
नीतीश ने अटल-आडवाणी का नाम लेते हुए कहा कि अब बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी-लाल कृष्ण आडवाणी के युग का अंत हो गया है। जब तक पार्टी में उनका अस्तित्व था जेडीयू और भाजपा का संबंध बना हुआ था, लेकिन अब नए दौर के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा था। नीतीश ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि बीजेपी बुजुर्ग नेताओं का सम्मान नहीं है।
हमने सोच-समझकर ये फैसला लिया है। नीतीश ने बीजेपी पर विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए तो गठबंधन कैसे बच पाता।गौरतलब है कि नीतीश के एनडीए गठबंधन से अलग होने के बाद अब उन्हें दुबारा से विश्वासमत हासिल करना होगा। इसके लिए नीतीश ने 19 जून को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।












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