मुलायम से डर गई सरकार, ठंडे बस्ते में गया 'भोजन का अधिकार'

manmohan singh
नयी दिल्ली। सरकार की बहुप्रतीक्षित महत्वाकांक्षी योजना खाद्य सुरक्षा विधेयक एकबार फिर से टल गई है। इस विधेयक को अध्यादेश के जरिए लागू करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में अलग-अलग मत उभरने के मद्देनजर अध्यादेश का इरादा फिलहाल छोड़ दिया गया।

खाद्य सुरक्षा बिल सोनिया गांधी के दिल से जुड़ी योजना है, लेकिन समाजवादी पार्टी, वामपंथी पार्टियों और कृषि मंत्री शरद यादव की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खाद्य सुरक्षा विधेयक को प्रभावी बनाने के लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाने के प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल की बैठक में कहा कि कई राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि संसद में विधेयक पर चर्चा होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे और संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ को खाद्य सुरक्षा विधेयक पर सहमति कायम करने के लिए विपक्षी पार्टियों से एक बार फिर बात करने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में आम राय विधेयक को संसद के विशेष सत्र में चर्चा कराकर पारित कराने के पक्ष में थी। विधेयक में देश की लगभग 67 फीसदी आबादी को सब्सिडी दर पर अनाज देने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर शुरू में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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