गोवा में बीजेपी का समुद्र मंथन, मोदी के नाम पर लग सकती है मुहर
नयी दिल्ली। दिल्ली की गर्मी से दूर गोवा के समुद्री बीच पर बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के छाए रहने की पूरी संभावना है। गोवा में होने जा रही कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदी का ही जलवा होगा। मोदी का जादू इस पूरी बैठक में चलेगा इसका इशारा गुजरात उपचुनाव के बाद ही मिलने लगा था।
गुजरात उपचुनाव में धमाकेदार जीत के बाद अब मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय भूमिका तय करने के लिए पार्टी पर दबाव बढ़ने लगा है। बीजेपी के इस मंथन में नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव कैंपेन कमेटी की कमान देने पर माथापच्ची का दौर जारी है। बीजेपी की इस मीटिंग में मोदी का रूतबा बढ़ाने की तैयारी हो रही है।

बैठक से ठीक पहले बीजेपी ने साफ कर दिया है कि अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए अहम मुद्दा नहीं है। पार्टी का कहना है कि भ्रष्टाचार, महंगाई पार्टी के लिए ज्यादा अहम मुद्दें हैं। ऐसा नहीं है कि अयोध्या मामला पार्टी के एजेंडे में शामिल नहीं है लेकिन इस मुद्दे को चुनाव में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
राम मंदिर का साथ छोड़ना बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होगा या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन गुजरात उपचुनाव में भाजपा की धमाकेदार जीत के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी में केंद्रीय भूमिका मिलना लगभग तय माना जा रहा है। गुजरात उपचुनाव में छहों सीट जीतकर मोदी ने अपने करिश्माई नेतृत्व को फिर से साबित कर दिया है। उपचुनाव में उनकी ये जीत दिल्ली की सत्ता में उनकी राह को आसान बनाएगा।
चुनाव परिणाम आने के बाद खुद मोदी ने केंद्र की कांग्रेस सरकार को आगाह किया और भाजपा की सरकार बनाने का दावा किया। कर्नाटक चुनाव के बाद विरोधियों की किरकिरी झेलना और उपचुनाव में जीत से मिली राहत के बाद मोदी के लिये रेडकार्पेट दिल्ली में तो बिछ चुकी है लेकिन रेडकार्पेट पर मोदी चलेंगे कब, इसका फैसला गोवा अधिवेशवन में हो सकता है।
बीजेपी को मोदी की अगुवाई इसलिये चाहिये क्योंकि वह केन्द्र की सत्ता पर काबिज होना चाहती है। यानी जो मोदी 2002 में वाजपेयी सरकार के लिये दाग थे वही मोदी 2013 में बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने के लिये तुरुप का पत्ता बन चुके हैं। मोदी के नमो मंत्र से बीजेपी दिल्ली की सत्ता हासिल ककरना चाहती है। अगर मोदी ने 2014 के मिशन को थामा तो बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़ेगी या नहीं ये तो बाद में पता चलेगा लेकिन मोदी को केन्द्रीय सत्ता में हिस्सा मिलने पर बीजेपी के भीतर काअंतर्द्वन्द्व बढ़ना तय है।












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