ममता के 2 साल पूरे- जानें कहां हुई पास और कहां फेल

जिन लोगों ने ममता को राजगद्दी पर बैठाया वहं लोग अब कहते है कि दीदी किसी की नहीं सुनती। उन्हें आलोचना बिल्कुल ही पसंद नहीं है। उन्हें अपनी ग़लतियों का एहसास भी नहीं है। जनता की इस नकारात्मक समीक्षा के बावजूद कोलकाता में जश्न का माहौल तैयार है। तमाम आलोचनाओं के बावजूद दीदी बधाईयां लेने में जुटी रही। सरकार मानती है कि उनका ये दो साल मिला जुला रहा। कई जगह सरकार कामयाबी मिली तो कई जगह दीदी को हार का सामना करना पड़ा। खासकर अपने तुनक मिजाज के कारण ममता लोगों के आलोचनाओं के घेरे में आती रही।
ममता हुई फेल-
- चिट फंड घोटाला ममता सरकार के लिए सबसे बड़ी बदनामी का सबक बन गया।
- पंचायती चुनाव को रोकने की अब तक की नाकाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी की सरकार दो साल पूरे होने पर खुद को बधाई देने में जुटी है।
- पश्चिम बंगाल सरकार गर्दन तक कर्ज में डूबी हुई है। ये कर्ज उसे विरासत में मिली है।
- हर साल राज्य सरकार के खजाने से रिज़र्व बैंक 26 हज़ार करोड़ रुपये निकाल लेता है जिससे राज्य के कर्जों की वसूली होती है।
- भारी भरकम कर्ज के तले दबे हहोने के बाद भी केंद्रीय सरकार द्वारा कर्जों की वसूली के कारण इसे आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
- अपनी तुनकमिजाजी के कारण ममता अपने ही लोगों के बीच आलोचना की पात्र बन गई है। कभी अपने ऊपर टिप्पणी करने वालों को जेल भेजकर तो कभी चित्रकार को हवालात में डालकर ममता लोगों और मीडिया के बीच अपनी छवि को बिगाड़ चुकी है।
ममता हुई पास-
- भारी कर्ज के बावजूद सरकार ने दावा किया है कि 2012-13 में राज्य की अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.06 फ़ीसदी रही जबकि इसी अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.96 फीसदी थी।
- ममता सरकार की बड़ी उपलब्धि है जंगल महल क्षेत्र में माओवादी हिंसा को ख़त्म करना।
- सरकार ने दस हज़ार नक्सलवादियों को हिंसा के रस्ते से हटने पर पुलिस में नौकरियां दी है। लेकिन इन सब के बावजूद ममता सरका को इन दो सालों के दौरान कई झटके भी लगे। पिछले साल कोलकता के जादवपुर विश्वविद्यालय केप्रोफसर अम्बिकेश महापात्र को इस बात के लिये गिरफ्तार कर लिया गया कि उन्होंने ममता बनर्जी के कुछ व्यंगयात्मक कार्टून ईमेल से अपने दोस्तों को भेजे थे। उनकी गिरफ़्तारी पर बहुत हंगामा हुआ। लोगों ने ममता बनर्जी के खिलाफ मानव अधिकार पर अंकुश लगाने का इलज़ाम लगाया और इस कांड के बाद से उनके आलोचक उन्हें तानाशाह कहने लगे। इन दो सालों में ऐसे कई कांड हुए जिन्होंने ममता की थोड़ी सफलता को बदमानी की बड़ी खाई में बदल दिया।












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