अखिलेश के सपाई के होंगे रिहा, निर्दोष जा रहे जेल!
बांदा। एक तरफ उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार बांदा जिले के सपाइयों के करीब डेढ़ सौ आम से लेकर संज्ञेय अपराधों में चल रहे मुकदमें वापस लेने की गुपचुप तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ एक दुष्कर्म की शिकार नाबालिग की मदद करने वालों को बबेरू सीओ कथित दलित उत्पीड़न के मामले में जेल भेजने कर रहे हैं। क्या इस दोहरी नीति से आगामी लोकसभा चुनाव में सपा विधानसभा चुनाव जैसा करिश्मा दिखा पाएगी?
आपको बता दें कि प्रदेश में सत्तारूढ़ अखिलेश यादव सरकार ने अभी हाल ही में बांदा जिले की विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन करीब डेढ़ सौ ऐसे आम और संज्ञेय मामले वापस लेने की गुपचुप कवायद शुरू की है, जो किसी न किसी रूप में सपा से जुड़े कार्यकर्ता या उनके परिजनों के खिलाफ दर्ज हुए थे। इनमें बलात्कार, हत्या के प्रयास और जबरन धन वसूली के मामले भी शामिल हैं।

इन मामलों को वापस लेने के लिए शासन ने जिला मजिस्ट्रेट के जरिए अभियोजन पक्ष से रिपोर्ट मांगी थी, जो प्रदेश के गृह विभाग को बांदा प्रशासन ने उपलब्ध भी करा दिया है। लेकिन यहां सनद रहे कि बिसंड़ा थाने के चैसड़ गांव में पिछले साल सामूहिक दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग लड़की की मदद करने वाले तीन युवकों को एक बार निर्दोष साबित करने के बाद सीओ बबेरू एक हिस्ट्रीशीटर के दबाव में जेल भेजने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
मामला कुछ यूं है कि वहां के ग्राम प्रधान जोहरा बेगम के हिस्ट्रीशीटर पति चुन्नू खां पूर्ववर्ती मायावती सरकार में बांदा के कद्दावर मंत्री की वर्दहस्ती में आतंक का पर्याय बना था, आलम यह था कि उसका बेटा पिंकी खान गांव के एक निर्जन स्कूल भवन में ‘पुलिस की शैतान चैकी' संचालित कर रहा था। सबसे गजब यह रहा कि ओरन पुलिस का एक सिपाही रोजाना यहां कथित ‘शैतान चैकी' में उनका हौसला आफजाई करने पहुंचता था। पिछले साल पिंकी खान ने अपने दो दोस्तों के साथ इसी जगह एक दलित किशोरी का रात भर रेप किया, सुबह तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ज्ञानेश्वर तिवारी के हस्ताक्षेप से पुलिस ने इस लड़की को बेहोशी की हालत में गांव के झोलाछाप डाक्टर की अस्पताल से बरामद किया।
गांव के बच्चा उर्फ रमेश कुशवाहा, विशम्भर व राजा का दोष सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने वाहन से दरिंदगी की शिकार उस लड़की को जिले की सरकारी अस्पताल पहुंचाया था। यहां भी हिस्ट्रीशीटर की हिम्मत देखिए, सरकारी अस्पताल में भी उसने इनके ऊपर जानलेवा हमला किया और यह हमला मीडिया की सुर्खियों में आया, फिर भी पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकी।
15 अक्टूबर 2012 की शाम इस हिस्ट्रीशीटर ने बच्चा और रेप की शिकार लड़की के चाचा बच्चूलाल को तेन्दुरा गांव के मोड़ पर घेर कर हत्या की कोशिश की, मौके पर पहुंचे तत्कालीन पुलिस चैकी इंचार्ज ओरन रमेशचंद्र ने उल्टे इन्हे हिस्ट्रीशीटर पर हमला करने के कथित आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, इतना ही नहीं, इस घटना के दूसरे दिन हिस्ट्रीशीटर की तहरीर पर गांव के नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या-197/12 धारा-147, 504 व 506 का का फर्जी अभियोग दर्ज किया गया, जो डीजीपी के आदेश पर हुई जांच में अपर पुलिस अधीक्षक बांदा स्वामी प्रसाद ने फर्जी करार दिया।
इन तमाम कोशिशों के बाद भी हिस्ट्रहशीटर के हौंसले पस्त नहीं हुए। उसने गांव के अपने हमराहियों के जरिए एक दलित सदाशिव को कब्जे में लिया और उसके ऊपर 2 मार्च को कृतिम हमला कराकर खुद दलित को गोली मारने की सूचना स्थानीय पुलिस को दी, मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष बिसंड़ा घनश्याम पांड़ेय ने तीनों युवकों को सोते समय उनके घरों से जगाकर उठा लिया और वास्तविक हालातों से पुलिस कप्तान को अवगत कराया। करीब पांच दिन तक अपनी हिरासत में रखने के बाद जांच-पड़ताल में निर्दौष साबित होने पर युवकों को कप्तान के आदेश पर रिहा कर दिया गया। इधर पुलिस कप्तान बदले तो इंसाफ भी बदल गया।
यही सीओ जो जांच के बाद घटना को फर्जी करार दे रहे थे, अचानक सही साबित करने लगे। एक पखवारे से उनका जीना हराम किए हैं। अब सवाल यह उठता है कि ‘जब यही युवक हमलावर हैं और पुलिस ने 2 मार्च को ही मुकदमा अपराध संख्या-24/13 धारा-307, 505, 506 व 3 (1) 10 एसएसी-एसटी दर्ज किया था, फिर इन्हें किस आधार पर रिहा किया गया और करीब डेढ़ माह तक चुप्पी क्यों साधे रहे? बताया जा रहा है कि अभी मामले का आरोप पत्र न्यायालय में विवेचक की तरफ से दाखिल नहीं हुआ, फिर भी जरिए फोन कथित आरोपियों के फोन पर सीओ साहब हाजिर न होने पर गाली-गालौज व घर गिरा देने की धमकी दे रहे हैं।
कथित आरोपी युवकों के अधिवक्ता राजाभइया कुशवाहा ने बताया कि ‘गुरुवार को बच्चा और विशम्भर को सीजेएम अदालत में हाजिर करने की अर्जी दी गई, लेकिन अदालत ने यह कर वापस कर दिया कि यह मामला पुराना है, सीओ की आख्या के बाद अगले दिन हाजिर करना।' न्याय की तलाश में दोनों युवक इसी दिन डीआईजी सुग्रीव गिरि से मिलकर विवेचक बदलने की मांग की तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि ‘चलो देख लेंगे।' यहां यह बताना जरूरी है कि इन पर जिस दलित को गोली मारने का आरोप है, वह अपने पड़ोस की एक दस साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म कर चुका है, पुलिस उसे पकड़ कर भी ले गई थी, मगर ग्राम प्रधान के हिस्ट्रीशीटर पति के दबाव में जबरियां पीडि़त परिवार से ओरन चौकी में सुलह करा दिया था। यह मामला भी आला अधिकारियों के संज्ञान में है।












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