श्रीलंकाई पयर्टक चले यूपी के बौद्धस्थलों की ओर

लखनऊ। बौद्धस्थलों को देखने की इच्छा रखने वाले श्रीलंकाई पर्यटन के लिए उत्‍तर प्रदेश में कुशीनगर जनपद पहली पसन्द बनता जा रहा है है। खास बात है कि श्रीलंकाई पर्यटकों का रुझान अब कुशीनगर की ओर बेहद बढ़ गया है और एक तरह से यह उनकी पसंदीदा जगहों में से एक हो गया है। यही वजह है कि इस वर्ष अब तक कुछ धर्मशालाओं की अग्रिम बुकिंग 2017 तक के लिए चल रही है।

यह पर्यटन उद्योग में अब तक का रिकार्ड है। स्थानीय श्रीलंका बौद्ध विहार के प्रबंधक श्रीलंका निवासी भिक्षु एच अस्सजी थेरो का कहना है कि कुशीनगर में पर्याप्त आवासीय सुविधा उपलब्ध न होने तथा श्रीलंका से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के कारण भविष्य में आवासीय कठिनाई न हो इसलिए अग्रिम बुकिंग की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उनके वहां 2014 तक कुछ ग्रुप की बुकिंग हो चुकी है।

Buddhist

भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार के प्रबंधक भंते महेंद्र ने बताया कि उनके यहां कुछ श्रीलंकाई ट्रैवल एजेंटों द्वारा 2017 तक की बुकिंग कराई गई है। प्रिंस गेस्ट हाउस के प्रबंधक देवता वर्मा का कहना है कि उनके वहां भी एडवांस बुकिंग की पेशकश मिल रही है। उधर, बौद्ध परिपथ उप्र के उपनिदेशक प्रदीप कुमार सिंह का इस सम्बन्ध में कहना है कि अग्रिम बुकिंग कराया जाना पर्यटन उद्योग के लिए शुभ संकेत है। बौद्ध परिपथ में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि श्रीलंका से सबसे अधिक पर्यटक भारत आते हैं। इसलिए भविष्य में असुविधा से बचने हेतु पूर्व योजना के तहत बुकिंग कराई जा रही है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग इसे शुभ संकते मानते हैं उनके मुताबिक जिस तरीके से पड़ोसी मुल्क भारती के बौद्ध स्थलों को लेकर रूचि ले रहा है उससे दोनों मुल्कों के बीच न सिर्फ सांस्कृतिक पहलू मजबूत होगा बल्कि दोनों के रिश्ते भी प्रगाढ़ होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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