पीएम साहब ने बोस्‍टन के लिये बहाये आंसू, भूले बैंगलोर ब्‍लास्‍ट

नयी दिल्ली। यूपीए सरकार देश को आंतकी हमले से सुरक्षित करने में तो नाकाम रही है, लेकिन लगाता है कि सरकार की संवेदनशीलता भी इस हमले में मर गई है। हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अमेरिका के बोस्टन शहर में धमके पर आंसू बहाना तो याद रहा, लेकिन बैंगलोर धमाका वो भूल गए। सबकी तरह बोस्टन धमाके पर पीएम को भी दुख हुआ। उन्होंने वैचारिकता निभाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को फोन कर अपना दुख जताया और संकट के घड़ी में साथ रहने का भरोसा भी दिया।

सोशल मीडिया साइट ट्वीटर पर भी पीएम मनमोहन सिंह लगातार बोस्टन हमले पर अफसोस जताते रहे और हमले में मरने वालों के लिए दुख जाहिर की, लेकिन जब बोस्टन हमले के अगले ही दिन देश की आईटी हब बैंगलोर में आंतकी हमला हुआ तो पीएम मनमोहन सिंह की सारी संवेदनशीलता मर गई। पीएम को इस आंतकी हमले पर अफसोस तक जताने की फुर्सत नहीं मिली।

Prime Minister Manmohan Singh

बोस्टन हमला ही नहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ईरान का भूकंप भी याद रहा। भूकंप में मरने वालों के पीएम ने सांत्वना संदेश जारी तक ईरान सरकार को भेजा, लेकिन बैंगलोर हमले को उन्होंने तव्वजो नहीं दी। क्या मनमोहन सिंह अपने देशवासियों के दुख से दुखी नहीं होते? उन्हें क्या बैंगलोर धमाके पर अफसोस नहीं हुआ? क्या अपने देश से ज्यादा पीएम को अमेरिका और इरान की चिंता है? भले ही ये सच ना हो, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के रवैये से तो यहीं लगता है।

जब प्रधानमंत्री कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो सोशल मीडिया पर पीएम की इस चुप्पी पर सवाल उठने शुरु हो गए। सवाल उठने लगे कि आखिर मनमोहन आंतकी हमले के बाद भी चुप क्यों? क्या पीएम की चुप्पी की वजह केवल यह है कि कर्नाटक में बीजेपी की सरकार है। क्या पीएम इसलिए चुप हैं क्योंकि आंतकी धमाका बीजेपी ऑफिस के सामने हुआ? क्या पीएम अपने पार्टी नेता शकील अहमद के उस बयान से इत्तेफाख रखते है जिसमें उन्होंने कहा कि बैंगलोर ब्लास्ट से बीजेपी को फायदा।

देश के प्रधानमंत्री होने के नाते ये उनका दायित्व है कि देश के दुख में शामिल हों। आंतकी हमले के बाद लोगों को सांत्वना दें, लेकिन ना तो प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और ना ही सरकार का कोई मंत्री। केवल सामने आए तो गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह। गृहमंत्री भी आए और रिति-रिवाज की तरह अपना कोटा पूरा कर वहां से चले गए। ना तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी सामने आई और ना ही राहुल बाबा।

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