भाजपा-जदयू के तलाक की वजह न बन जायें मोदी!
नयी दिल्ली। मोदी बनाम नीतीश की ताजी लड़ाई 2014 आम चुनाव से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण को नई शक्ल दे सकती है। गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के नीतीश कुमार की आपसी करवाहट जगजाहिर है। भाजपा के संभावित पीएम उम्मीदवार मोदी पर जेडीयू के हमले से भाजपा तिलमिलाती नजर आ रही है। खास बात यह है कि मोदी इस समय भाजपा के लिये तुरुप के पत्ते के समान हैं। लिहाजा वो बचाव के अलावा कुछ नहीं कर सकती।
इन दिनों मोदी लोगों को बीच जाकर जिस तरह से गुजरात मॉर्डल को पेश कर रहे है उससे तो भाजपा को यही लगता है कि मोदी ही 2014 में पार्टी की नैया को पार लगा सकते हैं। जब नीतीश ने मोदी पर तीर छोड़े तो भाजपा का तिलमिलाना लाजमी था। भाजपा किसी भी कीमत पर मोदी के नाम पर समझौता नहीं करना चाहती है।

मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को खारिज करते हुए भाजपा ने तुरंत पटलवार किया और कहा कि कोई भी उनके मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली पर टिप्पणी न करे। भाजपा के लिए नीतीश ने मुश्किल खड़ी कर दी है। अगर वो जेडीयू के गठबंधन को तवज्जो देती है तो मोदी की नाराजगी सहनी पड़ेगी जबकि अगर वो मोदी को पीएम प्रोजेक्ट करती है तो नीतीश का साथ छूटना तय है। जेडीयू ने भाजपा को अपना उम्मीदवार तय करने लिए दिसंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया है।
नीतीश ने यहां तक कह दिया कि वो कुर्सी खोने को तैयार हैं, लेकिन मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनने देंगे। पार्टी में सत्ता संघर्ष चरम पर है और नीतीश के ऐलान ने आग में घी का काम किया है। भाजपा भले ही मोदी के खिलाफ की गई इस टिप्पणी पर जेडीयू का विरोध कर रही हो, लेकिन वो जानती है कि अगर बिहार में अपनी पैठ बनाए रखनी है तो जेडीयू को किनारे नहीं किया जा सकता। दरअसल मोदी पर निशाना साधते हुए नीतिश भी अल्पसंख्यक वोटबैंक की राजनीती खेल रहे हैं मोदी पर जुबानी हमला कर नीतीश कुमार वास्तविकता में मोदी का गेम बिगाड़ना चाहते हैं।
मोदी पर नीतीश का ये तीर देश हित की राजनीति या है फिर और इसमें उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है। दरअसल मोदी के खिलाफ आग उगलकर नीतीश कुमार दो तरह की विचारधाराओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश में हैं। पहला सेकुलर या धर्मनिरपेक्ष होने का मुद्दा। इससे वह जहां सेकुलर इमेज प्रोजेक्ट करने वाली पार्टियों के बीच सबसे बड़े नेता के रूप में सामने आना चाहते हैं। दूसरा, वह पिछड़े राज्यों को एक मंच पर आने का संकेत देकर तीसरे मोर्चा की संभावना का दांव भी खेल चुके हैं। साफ है नीतीश के भाषण के बाद जेडीयू और भाजपा में तनाव बढ़ता दिख रहा है। नीतीश कुमार का मोदी विरोध काफी आगे बढ़ चुका है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नीतीश का ये कैसा विरोध है जहां वो मोदी को सांप्रदायिक और भाजपा को धर्मनिरपेक्ष मानते हैं। फिलहाल दोनों पार्टियां गठबंधन चलाने की बात कर रही हैं लेकिन सवाल ये भी है कि मोदी और नीतीश के बीच छिड़े जंग के बीच क्या 17 साल पुरानी दोस्ती बचेगी या मोदी को बचाने के लिए बीडेपी और जेडीयू का गठबंधन टूट जाएगा? कहीं मोदी नीतीश और भाजपा के बीच तलाक की वजह ना बन कर रह जाएं?












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