व्हार्टन ने जब मोदी को बुलाया था तो उन्हें सुनना चाहिए था: शशि थरूर
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। अपने बयानों को लेकर अकसर विवादों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस बार कांग्रेस से अलग नजरिया अपनाते हुए बयान दिया है। हांलाकि उनका ये बयान भी खासा चर्चा में और विवादों में आ गया है। शशि थरूर ने व्हार्टन द्वारा नरेन्द्र मोदी के संबोधन को रद्द किए जाने पर अस्वीकृति जाहिर करते हुए कहा है कि संस्थान को गुजरात के मुख्यमंत्री को आमंत्रित किए जाने के बाद उन्हें सुनना चाहिए था। इस बयान के बाद शशि थरूर का ध्यान जब इस बिंदु पर गया कि कांग्रेस के नेता इसका अलग मतलब निकाल सकते हैं तो उन्होंने संभलते हुए प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह अपनी पार्टी या सरकार की ओर से ऐसा नहीं कह रहे हैं, बल्कि अपना ‘व्यक्तिगत नजरिया' जाहिर कर रहे हैं।

शशि थरूर ने कहा है कि मैं मोदी से हर स्तर पर पूरी तरह असहमति रखता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि उनका निमंत्रण रद्द कर उनकी आवाज को दबाने से ज्यादा बेहतर है कि उनके रिकॉर्ड और विचारों पर बहस की जाये। उन्होंने एक बार जब मोदी को आमंत्रित किया तो मोदी के विचारों को सुनना उनका कर्तव्य था। थरूर ने इस बात का भी खुलासा किया कि 'वार्टन इंडिया इकनॉमिक फोरम' ने करीब छह हफ्ते पहले उनसे मुख्य वक्ता के तौर पर भाषण देने के लिए संपर्क किया था लेकिन संसद में व्यस्तताओं की वजह से उन्होंने मना कर दिया।
मालूम हो कि नरेन्द्र मोदी को 23 मार्च को वार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करना था लेकिन छात्रों और प्रोफेसरों के विरोध के चलते उनके भाषण को रद्द कर दिया गया। वार्टन स्कूल फोरम का कहना है कि उसे डर है कि अगर मोदी को बुलाया गया तो इसका विरोध हो सकता है। इसके अलावा वॉर्टन स्कूल में भाषण रद्द होने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को शिकागो में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे।












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