विहिप, भाजपा और साधु-संत डुबोएंगे नरेंद्र मोदी की नैया
विश्व हिन्दू परिषद, भारतीय जनता पार्टी और देश भर के साधु संत, जिन्होंने एक सुर में नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिये लिया है। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन इसी के साथ राम मंदिर निर्माण की बात कहकर इन सभी ने नरेंद्र मोदी की उस नैया को डुबोने का पूरा इंतजाम कर दिया, जिसमें सवार होकर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक जाना है।
जी हां विहिप ने अपने सम्मेलन में सुर ऊंचे करते हुए नरेंद्र मोदी को पीएम कैंडिडेट बनाने का समर्थन कर दिया। वैसे भाजपा यही चाह भी रही थी, ताकि वो एनडीए में अपने सहयोगी दलों से यह कह सके कि मोदी को पीएम कैंडिडेट बनाना सिर्फ उसकी अपनी राय नहीं है। संगम के तट पर आये साधु संतों ने भी मोदी के नाम का ऐलान कर दिया। सच पूछिए तो हिन्दूवादी पार्टी होने के नाते अभी तक जो कुछ भी हुआ था, वो सब एकदम सही था और मोदी को आगे बढ़ाने में मददगार भी।

लेकिन भाजपा के राजनाथ सिंह, विहिप के प्रवीण तोगड़िया व अशोक सिंघल और आरएसएस के मोहन भागवत ने धर्म संसद के दौरान राम मंदिर बनाने का ऐलान कर मोदी की डगर को कमजोर बनाने का काम किया है। जिस मोदी ने गुजरात दंगों के 10 साल बाद जाकर अपने राज्य के मुसलमानों के दिलों में जगह बनायी है, राम मंदिर की बात कर, यह छवि पल में धूमिल हो सकती है। बात यहां सिर्फ गुजरात की नहीं होगी, यहां पूरे देश के मुस्लिमों के दिलों में एक कचोट सी उठेगी, जब वो लोकसभा चुनाव में ईवीएम का बटन दबाने जायेंगे।
एक तरफ मोदी जहां विकास, सकारात्मक सोच और भारत को शक्तिशाली देश बनाने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भाजपा राम मंदिर का राग अलाप कर फिर से गर्त में जाने की तैयारी में जुटी है। राजनाथ सिंह का इसमें बहुत बड़ा हाथ है। यूपी विधानसभा चुनाव के वक्त भी उनका रथ जहां-जहां गया, वहां-वहां उन्होंने मंदिर बनाने की बात कही। यही बात थी जो भाजपा को यूपी चुनाव में ले डूबी। अब लोकसभा चुनाव है। मोदी इस चुनाव में मछली की आंख के अंदर औद्योगिक विकास, रोजगार, अपराध रहित समाज, मजबूत अर्थव्यवस्था, आदि देख रहे हैं, वहीं भाजपा के अन्य नेता उसी मछली की आंख में राम मंदिर देख रहे हैं, और यही बातें मोदी की इस नैया को इसी संगम में डुबो देंगी, जहां करोड़ों लोग डुबकी लगा रहे हैं।












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