लोकपाल में 'NGO इन एंड CBI आउट' को सरकार की मंजूरी

इन संशोधनों के मुताबिक बिल पास होने के 1 साल बाद सभी राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ती की जाएंगी। वही सीबीआई को लोकपाल से बाहर रखा गया है। इन संसोधनों के बाद से सभी धार्मिक संस्थाएं और राजनीतिक दल भी लोकपाल से बाहर होगे। वही पीएम को कुछ शर्तों के साथ लोकपाल के दायरे में रखा गया है। लोकपाल नियुक्ति मामले पर बोलते हुए नारायणस्वामी ने कहा कि लोकपाल की नियुक्ति 5 सदस्यों की समिति करेंगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, सदन में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल होंगे। लोकपाल का कार्यकाल दो साल का होगा और वो किसी भी पार्टी का सदस्य नहीं होंगे। इन संशोधनों के बाद आगामी बजट सत्र के दौरान सरकार इसे राज्यसभा में पेश करेगी।
लोकपाल बिल में सरकार द्वारा इन संशोधनों को मंजूरी दिए जाने पर प्रमुक विपक्षी पार्टी ने इसकी निंदा करते हुए कहा है कि बीजेपी एक ऐसा लोकपाल चाहती है जो सरकार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो। सीबीआई को लोकपाल के दायरे से अलग रखने के फैसले पर बीजेपी ने ऐतराज जताते हुए कहा है कि सीबीआई को एक निष्पक्ष संस्था के तौर पर काम करना चाहिए, उसे लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए। जबकि मजबूत लोकपाल बिल के लिए आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल में बदलावों को खारिज कर दिया है।












Click it and Unblock the Notifications